यूपी में टलेगा पंचायत चुनाव? हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी योगी सरकार, ये हैं 5 बड़े कारण
News By-नितिन केसरवानी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। हाईकोर्ट द्वारा पंचायत चुनाव समय पर कराने के सख्त आदेश के बाद अब शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार यूपी सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की तैयारी में है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल न्याय विभाग हाईकोर्ट के आदेश का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद ही कैबिनेट की मंजूरी से सुप्रीम कोर्ट में अपील पर अंतिम मुहर लगेगी।
सरकार के सामने 5 बड़ी व्यावहारिक कठिनाइयां
सरकार पंचायत चुनाव टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जिन दलीलों को रख सकती है, वे इस प्रकार हैं –
1. ओबीसी आरक्षण का पेंच फंसा: पंचायत चुनाव के लिए सबसे अहम ओबीसी आरक्षण का निर्धारण अभी अधूरा है। इसके लिए बनाए गए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल 20 नवंबर को खत्म हो रहा है। आयोग अब तक केवल 42 जिलों का ही दौरा कर पाया है, जबकि 33 जिलों में सर्वे का काम बाकी है। बिना आरक्षण तय हुए चुनाव कराना कानूनी रूप से संभव नहीं है।
2. प्रशासनिक मशीनरी पर दोहरा दबाव: दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 तक जनगणना का दूसरा चरण प्रस्तावित है, जिसमें प्रदेश के लाखों शिक्षक और कर्मचारी लगेंगे। इसी दौरान पंचायत चुनाव कराने से पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है।
3. विधानसभा चुनाव नजदीक: जनवरी में ही विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। ऐसे में दो चुनाव एक साथ कराना प्रशासन और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
4. परीक्षाओं का सीजन: दिसंबर-जनवरी में बोर्ड परीक्षाओं और कई भर्ती परीक्षाओं का आयोजन होना है, जिसमें स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है और कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है।
5. मतदाता सूची के बाद प्रक्रिया रुकी: हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग 10 जून को मतदाता सूची जारी कर चुका है, लेकिन उसके बाद आरक्षण निर्धारण न होने से आगे की प्रक्रिया ठप पड़ी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो पंचायत चुनाव कम से कम 4 से 6 महीने के लिए टल सकते हैं और अब ये चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होने की संभावना प्रबल होती जा रही है।