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ग्राम पंचायत नेबूहा में सचिव पुत्र नेता के कब्जे का आरोप, पंच,उप सरपंच के शिकायत पर भी नहीं हो रही कार्यवाही।  कलेक्टर,विधायक के निर्देश व एसडीएम मझौली द्वारा गठित जांच टीम बेअसर।

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ग्राम पंचायत नेबूहा में सचिव पुत्र नेता के कब्जे का आरोप, पंच,उप सरपंच के शिकायत पर भी नहीं हो रही कार्यवाही।

 

कलेक्टर,विधायक के निर्देश व एसडीएम मझौली द्वारा गठित जांच टीम बेअसर।

 

सीधी/मझौली

 

नेता, प्रतिनिध,एवं अधिकारियों कर्मचारियों व पंचायत कर्मियों के सगे संबंधी तथा शुभचिंतक पंचायती ठेकेदार बन ग्राम विकास की राशि डकार रहे। ऐसा मामला सबसे ज्यादा

महिला आरक्षित ग्राम पंचायत में देखा जा रहा है जहां सरपंच सचिवों भ्रष्टाचार की राशि से तले निवाला डाल ग्राम पंचायतों को कब्जे में ले भ्रष्टाचार को अंजाम दे उनका जमकर शोषण किया जा रहा है। जिसकी जांच यदि वास्तविक रूप से हुई तो इन्हें जेल की हवा की खानी पड़ सकती है।‌

ताजा मामला सीधी जिले के जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत नेबूहा का सामने आया है।जिसकी शिकायत जनप्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों द्वारा उपखंड मझौली से सीधी तक लगातार 3 वर्षों से रहे है लेकिन न जाने किस प्रभाव से अधिकारी कर्मचारी कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं! शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव के ही सचिव जो अब बगल के ग्राम पंचायत धनौली में पदस्थ हैं जिन्होंने ग्राम पंचायत में पदस्थ रहते हुए भारी भ्रष्टाचार को अंजाम दे उसी भ्रष्टाचार के राशि से अभी भी अपना प्रभाव जमा रखे हैं।

उनके पुत्र जो अभी हाल ही में दो-तीन वर्षों से राजनीति में कदम रखे हैं। आदिवासी महिला सरपंच एवं अनभिज्ञ पिछड़ा वर्ग निर्बल सचिव जिन्हें निर्माण कार्य के रेशियों की भी जानकारी नहीं होती को भ्रष्टाचार की रिपोर्ट के तेल से तले निवाला खिला ग्राम पंचायत को अपने कब्जे में ले दबंगई पूर्वक भ्रष्टाचार को अंजाम दे उनका शोषण किया जा रहा है।यहां तक की राशि आहरण के बाद कार्य नहीं किया गया है! ग्राम पंचायत में कई ऐसे अधूरे काम पड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री आवास वाले हितग्राहियों की मजदूरी की राशि थी हड़प ली गई है। शिकायतकर्त्ता जनप्रतिनिधियों एवं लोगों द्वारा बताया गया कि हम लोग एवं हितग्राही लगातार हो रहे भ्रष्टाचार एवं गरीबों के शोषण के शिकायत कर रहे हैं लेकिन कार्यवाही के नाम पर लीपा पोती की जा रही है। अभी हाल ही में अप्रैल माह 2026 में कलेक्टर द्वारा ग्राम पंचायत में

आयोजित शिविर में जांच कार्यवाही के लिए हम लोगों द्वारा आवेदन दिया गया था। कलेक्टर विकास मिश्रा एवं क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम द्वारा अधिकारियों को तत्काल जांच कार्यवाही की निर्देश थे जिनके निर्देशों के परिपालन में एसडीएम मझौली द्वारा 20 अप्रैल को जांच टीम गठित करते हुए 7 दिन में प्रतिवेदन मांगा गया था लेकिन दो महीने से अधिक के समय बीत जाने के उपरांत भी अभी तक जांच टीम जांच करने ग्राम पंचायत नहीं पहुंच पाई है।हां जिसकी भनक लगते ही जिला पंचायत सीधी से एक अधिकारी पहुंचे थे जो शायद कमीशन की बांग डोर में जकड लिए है ! 3-4 महीने पूर्व विना कार्य किए राशि आहरित कर गोलमाल कर लिए जाने शिकायत होने पर एक जांच अधिकारी के आने के उपरांत मशीनरी का उपयोग कर घटिया निर्माण भले कराया जा रहा हो लेकिन दो-तीन महीने बीत जाने के बाद अभी तक किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई।

 

*जल गंगा संवर्धन अभियान की खुली रही पोल*

 

ग्राम पंचायत में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत लाखों के लागत से कई चेक डैम बनाए गए थे जो बनते ही पहली बारिश में धारासाही हो गए जिसकी शिकायत भी उपसरपंच,पंच एवं लोगों द्वारा क्षतिग्रस्त हुए दिनांक से लगातार की जा रही है लेकिन अभी तक ना तो किसी तरह की कोई कार्यवाही हुई ना ही क्षतिग्रस्त हुए चेक डेमो का मरम्मत कराया गया। शिकायतकर्ताओं की माने तो हम लोगों के समक्ष ही सचिव को मरम्मत कर कराए जाने के लिए निर्देशित किया गया था लेकिन एक वर्ष बीत जाने व दूसरे वर्ष की वारिस का समय आ जाने के उपरांत भी इन चेक डेमो का मरम्मत कर नहीं कराया गया है जिससे क्षेत्र का जलस्तर घटता जा रहा है तथा लोगों को जल संकट का भय सता रहा है।

 

 

*कार्य स्थल व पंचायतों में नदारद रहते हैं जिम्मेदार*

 

लोगों द्वारा मिल रही शिकायत पर जब मीडिया की टीम कार्य स्थल पर व ग्राम पंचायत में पहुंचती है तो शिकायतकर्ताओं द्वारा की गई शिकायत सही निकलती है। ग्राम पंचायत एवं निर्माणाधीन कार्य स्थल में पंचायत कर्मी व अन्य जिम्मेदार अधिकारी कभी नहीं मिलते हैं। ग्राम पंचायत भवन में तो अधिकांशत ताला लटका रहता है।वही कार्य स्थल में उनके स्थान पर पंचायती ठेकेदार बने नेता, प्रतिनिधि एवं सरपंच-पन्च के सगे – सम्बन्धी घटिया कार्य करते मिलते हैं जिसकी सूचना एवं शिकायत पर भी किसी तरह से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। ऐसे में लोगों के माने तो भ्रष्टाचार की कमीशन की राशि से बरी जा रही डोरी जिम्मेदारों के कलम बांध रखी है! जो अपने कर्तव्य दायित्व को भूल कार्यस्थल से कोसों दूरी बना शायद कमीशन की राशि एसो आराम फरमा रहे हैं।

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