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जो कर्म निस्वार्थ भाव से किया जाता हे वही सच्चा पुरुषार्थ है — संत श्रीनारायण प्रसाद ओझा

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लोकेशन धामनोद

संवददाता मोनु पटेल

 

 

*नन्द घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की*

*जो कर्म निस्वार्थ भाव से किया जाता हे वही सच्चा पुरुषार्थ है — संत श्रीनारायण प्रसाद ओझा*

 

धामनोद श्री वेंकटेश बालाजी मंदिर में राधा अष्टमी से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के आज चतुर्थ दिवस में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया झांकी के रूप में प्रसंग को चरितार्थ किया बधाइयां दी गई बधाइयां गाई गई बधाइयां बांटी गई नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजनों से पूरा पंडाल गूंजता रहा महिला पुरुष बच्चे बुजुर्ग सभी ने जमकर ठुमके लगाए ऐसा लग रहा था

जैसे गोकुल और वृंदावन में कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है आज की कथा में व्यास पीठ पर विराजित संत श्री नारायण प्रसाद ओझा ने बताया कि जो कर्म निस्वार्थ भाव से किया जाता है वही सच्चा पुरुषार्थ है वही परमात्मा की सच्ची सेवा है जो कर्म स्वार्थ भाव से किया जाता है वही कर्म मानव के दुखों का कारण बनता है स्वार्थ और निस्वार्थ के अंतर को जो समझ लेता है उसी को योगी पुरुष कहते हैं और वही परमात्मा का सच्चा भक्त कहलाता है और जो इस अंतर को करने की योग्यता प्राप्त नहीं कर पता है वह जीव होकर जगत में दुखों को प्राप्त होता है उदाहरण के लिए मनुष्य जो कर्म स्वयं के लिए करता है वह स्वार्थ है और जो जगत के लिए करता है वह निस्वार्थ है कल की कथा में गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग प्रसाद का आयोजन किया जाएगा सैकड़ो भक्त महिला पुरुष कथा का आनंद ले रहे हैं

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