भरवारी में भव्य भरत मिलाप के साथ दशहरा मेले का समापन, चारों भाइयों का मिलन देख छलके श्रद्धालुओं के आंसू
News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी
14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम, भरत ने गले लगाकर किया स्वागत; रातभर निकलीं आकर्षक झांकियां, शिव तांडव और काली तांडव की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
भरवारी/कौशांबी: मर्यादा, त्याग, प्रेम और भाईचारे का अनुपम संदेश देने वाला भरत मिलाप का पावन प्रसंग गुरुवार की देर रात भरवारी के ऐतिहासिक दशहरा मेले में श्रद्धा और उल्लास के साथ जीवंत हो उठा। 14 वर्ष का वनवास पूरा कर लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के मिलन का भावुक दृश्य देखकर हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो गए। जैसे ही चारों भाइयों का मिलन हुआ, पूरा मेला परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
नगर पालिका परिषद भरवारी की ओर से आयोजित श्री रामलीला कमेटी पुरानी बाजार का दो दिवसीय दशहरा मेला पुरानी बाजार स्थित हनुमंत निकेतन मंदिर परिसर में भव्य भरत मिलाप के मंचन के साथ संपन्न हुआ। रामलीला के इस प्रसंग में भगवान श्रीराम के प्रति भरत के अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का सुंदर चित्रण किया गया।
भरत के त्याग और भाईचारे की जीवंत हुई मिसाल
रामायण के अनुसार, पिता राजा दशरथ के वचन का मान रखने के लिए भगवान श्रीराम ने 14 वर्षों तक वनवास स्वीकार किया था। उनके वन जाने के बाद जब भरत को अयोध्या का राजपाट सौंपा गया तो उन्होंने सिंहासन पर बैठने के बजाय प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं को राजगद्दी पर स्थापित कर स्वयं सेवक के रूप में राज्य का संचालन किया। भरत ने नंदीग्राम में रहकर प्रभु श्रीराम की वापसी की प्रतीक्षा की।
वनवास की अवधि पूरी होने के बाद जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तो भरत की वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई। भरत मिलाप का यही प्रसंग भाई के प्रति प्रेम, त्याग, विश्वास और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत उदाहरण है। भरवारी में इसी भावपूर्ण दृश्य का मंचन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। इसके बाद भव्य आतिशबाजी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी।

रातभर झांकियों और नृत्य प्रस्तुतियों ने बांधा समां
भरत मिलाप के बाद स्थानीय चौकी कमेटियों की ओर से चार आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इनमें काली तांडव, शिव तांडव, राधा-कृष्ण नृत्य और बजरंगबली के नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। लाइट एवं साउंड प्रतियोगिता शुक्रवार सुबह सात बजे तक चलती रही। पूरी रात कस्बे में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु झांकियों का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम में रामलीला कमेटी अध्यक्ष संतोष केसरवानी, महामंत्री अमित वर्मा, चायल के पूर्व विधायक संजय गुप्ता, पूर्व चेयरमैन गंगा प्रसाद केसरवानी उर्फ काले, कैलाश चंद्र केसरवानी, ज्योति केसरवानी, नीरज बनारसी, गोपाल जी ,भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य, ज्योति ,राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा और एडवोकेट राम प्रकाश मिश्रा समेत हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

धार्मिक आयोजन के बीच जेबकतरों का आतंक
एक ओर जहां पूरा कस्बा भक्ति और उत्साह में डूबा रहा, वहीं दूसरी ओर मेले में जेबकतरों ने श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा दी। बताया गया कि दो दर्जन से अधिक लोगों की जेब कट गई। कई लोगों के पर्स और नकदी गायब हो गए, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने मोबाइल फोन गुम होने की शिकायत की। भीड़भाड़ के बीच हुई इन घटनाओं से मेले में आए लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
भरवारी का ऐतिहासिक दशहरा मेला एक बार फिर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश देकर संपन्न हुआ। भरत मिलाप के माध्यम से लोगों को यह सीख मिली कि रिश्तों में प्रेम, त्याग और समर्पण हो तो कोई भी परिस्थिति परिवार और समाज की एकता को कमजोर नहीं कर सकती।
