महारास लीला ने मोहा मन, कंस वध के बाद हुआ कृष्ण-रुक्मणी विवाह
खरगोन जिले से
बरूड़। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस कथावाचक पं. श्री निशांत जी पारसाई ने भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला, कंस वध, रुक्मणी हरण एवं कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। महारास लीला के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। वहीं कंस वध के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अत्याचार एवं अधर्म के अंत का संदेश दिया गया।

रुक्मणी हरण प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। इसके बाद कृष्ण-रुक्मणी विवाह का आयोजन उत्साहपूर्वक हुआ। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी के जयकारे लगाए। विवाह प्रसंग के दौरान कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।