News By-नितिन केसरवानी
38 वर्षों से जारी श्री दुर्गा महोत्सव में उमड़ रही श्रद्धा, बाल व्यास राज राजेश्वर महाराज ने संगीतमय कथा से दिया भक्ति और सद्कर्म का संदेश
कौशाम्बी: नगर पालिका परिषद भरवारी के नया बाजार स्थित पानी टंकी परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर के समीप आयोजित श्री दुर्गा महोत्सव में भक्ति और अध्यात्म की धारा प्रवाहित हो रही है। श्री दुर्गा महोत्सव समिति की ओर से 38 वर्षों से लगातार चली आ रही परंपरा के तहत मां दुर्गा की स्थापना की गई है। महोत्सव में 11 से 19 अक्टूबर तक आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वृंदावन धाम से पधारे बाल व्यास श्री राज राजेश्वर महाराज संगीतमय कथा और ओजपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दे रहे हैं। कथा के दौरान उन्होंने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए धुंधकारी चरित्र की मार्मिक कथा सुनाई। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महाराज ने कथा के माध्यम से सत्कर्म, सदाचार और ईश्वर भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
धुंधकारी चरित्र से दिया सद्मार्ग पर चलने का संदेश
बाल व्यास राज राजेश्वर महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को अधर्म से दूर रहकर सत्कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा के बीच प्रस्तुत भजन और संगीतमय प्रसंगों ने पंडाल में भक्तिमय माहौल बना दिया। श्रद्धालु एकाग्र होकर कथा का रसपान करते रहे और मां भगवती के जयकारों से परिसर गूंजता रहा।
38 वर्षों से कायम है धार्मिक परंपरा
श्री दुर्गा महोत्सव समिति द्वारा चार दशक के करीब समय से आयोजित यह महोत्सव भरवारी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। मां दुर्गा की स्थापना, विधि-विधान से पूजन और श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर है। मुख्य यजमान जगदीश शिवहरे ने पत्नी मिथिलेश के साथ विधि-विधान से पूजन किया और मां भगवती की आरती कराई।

गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
धार्मिक आयोजन में संजय, कमलेश टिकरा वाले, अरविंद केसरवानी, यश शिवहरे, कीर्ति कुमार, प्रेम नारायण और रितांशु केसरवानी सहित नगर के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। महिलाओं ने भी पूजन-अर्चन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने मां भगवती से परिवार, समाज और नगर की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन 19 अक्टूबर को होगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। मां दुर्गा की आराधना और भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालु धर्म, आस्था और सदाचार के संदेश को आत्मसात कर रहे हैं।