*14 वर्षीय खिलेश की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने श्रीकृष्णा हॉस्पिटल पर लगाया गलत इलाज का आरोप*
*पिता बोले- समय पर सही इलाज मिलता तो शायद आज मेरा बेटा हमारे बीच होता, मेडिकल जांच से सामने आए सच्चाई*
दैनिक प्राईम संदेश न्यूज़/जांजगीर-चांपा
सरवानी निवासी 14 वर्षीय खिलेश साहू, पिता भोले शंकर साहू की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने चांपा के गौरव पथ स्थित श्रीकृष्णा हॉस्पिटल के चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने और गलत उपचार किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में उपचार के दौरान बच्चे की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और बाद में जब उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

मृतक के पिता भोले शंकर साहू के मुताबिक, उन्होंने अपने 14 वर्षीय पुत्र खिलेश को इलाज के लिए श्रीकृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उनका कहना है कि इलाज शुरू होने के करीब दो घंटे बाद बच्चे की हालत में कुछ सुधार नजर आया, लेकिन इसके बाद उसकी स्थिति जस की तस बनी रही। पिता का आरोप है कि चिकित्सकों द्वारा जल्द हालत में सुधार होने का भरोसा दिए जाने के कारण उन्होंने अस्पताल में ही उपचार जारी रखा और करीब दो दिन और इंतजार किया।

हालांकि, बेटे की बिगड़ती हालत को देखते हुए भोले शंकर साहू ने बाद में अपनी मर्जी से खिलेश को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। पिता के अनुसार, बाहर के चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें बताया कि मरीज को लाने में काफी देर हो चुकी है। इसके बाद चिकित्सकों की सलाह पर खिलेश का उपचार और ऑपरेशन कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
बेटे की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन
खिलेश की मौत के बाद गुस्साए पिता भोले शंकर साहू अपने परिजनों के साथ चांपा के गौरव पथ स्थित श्रीकृष्णा हॉस्पिटल पहुंचे। यहां उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों के समक्ष अपना आक्रोश जताते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों का कहना है कि यदि खिलेश को समय रहते उचित उपचार मिल जाता तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। पिता भोले शंकर साहू ने भावुक होते हुए कहा कि उनके बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलना ही उनके बेटे को सच्चा न्याय होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार के साथ जो हुआ, वह भविष्य में किसी दूसरे परिवार के साथ नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
मेडिकल जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14 वर्षीय खिलेश की मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या थी? क्या इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या फिर मरीज की गंभीर स्थिति के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी?
परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की राय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में मामले में मेडिकल बोर्ड या सक्षम स्वास्थ्य विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठ रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन अथवा संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।