News By-नितिन केसरवानी
भरवारी (कौशांबी): स्वतंत्रता पर्व के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत 17 अगस्त को भवन्स मेहता महाविद्यालय, भरवारी में ‘स्वराज की संकल्पना’ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक एवं विचारक प्रो. कृष्णस्वरूप आनन्दी ने स्वराज की अवधारणा पर विस्तार से विचार रखे।
मुख्य वक्ता प्रो. आनन्दी ने कहा कि संविधान में स्वराज शब्द का उल्लेख भले ही नहीं है, लेकिन स्वाधीनता आंदोलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महात्मा गांधी ने ‘हिन्द स्वराज’ के माध्यम से स्वराज की केंद्रीय अवधारणा प्रस्तुत की थी। स्वराज में सत्ता के विकेंद्रीकरण की कल्पना थी, जिसकी मूल इकाई ग्राम थी। गांव से लेकर केंद्र तक सत्ता के विभिन्न स्तर निर्धारित थे। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ा है, जिससे अनेक इकाइयां और समुदाय पीछे छूटते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वराज में ‘स्व’ का विस्तार है और इस ‘स्व’ में सभी शामिल हैं। किसी एक देश, समुदाय या धर्म को आगे बढ़ाकर अन्य समुदायों को पीछे छोड़ देना स्वराज की अवधारणा के अनुरूप नहीं हो सकता।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रबोध श्रीवास्तव ने कहा कि स्वराज सहजीवन की अवधारणा है। आज व्यक्ति की पहचान उसके नाम से अधिक एक यूनिक नंबर तक सीमित होती जा रही है। व्यक्ति का डिजिटल पहचान में बदल जाना हमारे समय की बड़ी विडंबना है। उन्होंने कहा कि आज हमें पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि क्या स्वराज की परिधि में सभी धर्म, समुदाय और जनता समान रूप से शामिल हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों एवं शिक्षकों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विवेक निराला ने किया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. धर्मेंद्र अग्रहरि ने किया।
इस अवसर पर प्रो. रूबी सिंह, प्रो. श्वेता, प्रो. अरुण सिंह, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. विमलेश सिंह यादव, प्रो. सतीश तिवारी, डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव, डॉ. राहुल राय, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. महेंद्र उपाध्याय, डॉ. अनुज तिवारी, डॉ. मोहम्मद आदिल सहित महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।