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*26 दिसंबर को सभी शैक्षणिक संस्थानों में मनाया जाएगा वीर बाल दिवस*

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*धुलकोट। बुरहानपुर*

 

*संवाददाता दिलीप बामनिया*

 

*26 दिसंबर को सभी शैक्षणिक संस्थानों में मनाया जाएगा वीर बाल दिवस*

 

*शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के मध्य प्रांत संयोजक ओमप्रकाश जी शर्मा ने किया आव्हान*

 

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली मध्य प्रांत संयोजक और शिक्षा से आत्मनिर्भरता भारत के राष्ट्रीय संयोजक ओमप्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन और निर्देशन में संपूर्ण मध्य भारत प्रांत के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में वीर बाल दिवस 26 दिसंबर को मनाया जाएगा उन्होंने बताया कि वीर बाल दिवस को सिक्खों के दसवें गुरु गुरुगोबिंद सिंह जी के चार पुत्रों अजीत सिंह जुझार सिंह जोरावर सिंह फतेह सिंह की शहादत पर मनाया जाता है। गुरुगोविन्द सिंह के साहिबजादों ने धर्म और मानवता के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी मुगलों के खिलाफ जंग में यही साहिबजादे डटकर खड़े हुए थे और जंग में शहीद हो गए थे

 

ओमप्रकाश जी शर्मा ने बताया कि वीर बाल दिवस साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को याद करने का दिन है। यह दिन उनके साहस और सत्यनिष्ठा पर बल देता है और भारतीय युवाओं को वीरता ईमानदारी और दृढ़ता के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम उनके बलिदान को उजागर करते हैं और देश भर में बाल विकास पहलों को बढ़ावा देते हैं। वीर बाल भारत में एक राष्ट्रीय स्मृति दिवस है जो दसवें सिख गुरु गुरुगोविंदसिंह जी के छोटे बेटों की असाधारण वीरता और शहादत को याद करता है। यह उत्सव विशेष रूप से साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह पर केंद्रित है उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासनकाल में हर विपरीत परिस्थिति का सामना करते हुए असाधारण वीरता का परिचय दिया। जब वज़ीर खान के नेतृत्व वाली मुगल सेना ने दो युवा साहिबजादों को बंदी बना लिया था। क्रमशः केवल नौ और छह वर्ष की आयु के इन दोनों बच्चों पर अपने धर्म को त्यागकर इस्लाम धर्म अपनाने का अत्यधिक दबाव डाला गया परन्तु दोनों बच्चों ने अपने विश्वास पर अडिग रहने का निश्चय किया। उनके इस अडिग रुख के कारण ही उनकी क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई। उनके अवज्ञा के दंड स्वरूप उन्हें जिंदा ही ईंटों से चुनवा दिया गया। शहादत का यह शक्तिशाली कृत्य हमें धर्म और न्याय के नाम पर किए गए बलिदानों की याद दिलाता है।

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को निर्णय लिया था जो भारत के इतिहास में बच्चों के योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। जिसमें युवा पीढ़ी को लचीलेपन और नैतिक अखंडता के बारे में सिखाने के महत्व पर जोर दिया गया।

राष्ट्रीय कार्यशाला बड़वानी में ओमप्रकाश जी शर्मा ने अपने उद्बोधन में आह्वान किया था कि हमें हमारी सनातन संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा का निर्वाहन करते हुए हमारे बच्चों को इन साहिबजादों के जीवन गाथा बताना चाहिए हमें हमारे बच्चों को सेंटाक्लोज ना बनाते हुए जोरावर सिंह और फतेह सिंह बनाना चाहिए वीर बाल दिवस पराक्रम और नई सोच का निर्माण करता है। यह दिन न केवल साहिबजादों की स्मृति का दिन है, बल्कि भारतीय युवाओं को साहस, ईमानदारी और निस्वार्थता जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का एक मंच भी है। इस दिन राष्ट्रीय कार्यक्रम में जिसमें बच्चों के बेहतर पोषण और कल्याण संबंधी परिणामों में सहभागिता बढ़ाने के लिए सुपोषित पंचायत अभियान भी चलाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, कला, संस्कृति, वीरता, नवाचार, विज्ञान, खेल और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

 

वीर बाल दिवस कई कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है यह सिख इतिहास के योगदान का आदर करता है और इस तथ्य को रेखांकित करता है कि किसी को भी उत्पीड़न के आगे आत्मसमर्पण नहीं करना चाहिए। साहिबजादों की कहानियां धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस दिन विद्यालयों और समुदायों को बच्चों को साहिबजादों द्वारा प्रतिरूपित मूल्यों विपत्ति में साहस और अटूट आस्था के बारे में शिक्षित करने का एक शैक्षिक अनुभव प्रदान करता है। इस दिवस को मनाते हुए, भारत विविधता में एकता के अपने संकल्प को दोहराता है। इन युवा योद्धाओं के बलिदान न्याय और नैतिक दृढ़ता के व्यापक विषयों को प्रतिध्वनित करते हैं, जो भारत के भीतर विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों से परे हैं। वीर बल दिवस का उद्देश्य युवा मन को जोरावर सिंह और फतेह सिंह द्वारा प्रदर्शित वीरता का अनुकरण करने के लिए प्रेरित करना है। यह उन्हें चुनौतियों का सामना करते हुए भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने के लिए प्रोत्साहित करता है ।

 

वीर बाल दिवस केवल अतीत को स्मरण करने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें यह सिखाता है कि साहस की कोई उम्र नहीं होती। यह दिवस हमें सिखाता है कि सच्चाई, नैतिकता और देशप्रेम के लिए यदि आवश्यकता पड़े तो कठिन से कठिन बलिदान भी छोटा लगने लगता है।

आज के विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। वीर साहिबज़ादों का जीवन हमें अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, आत्मबल और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाता है। यदि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो एक सशक्त, संस्कारित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकते हैं। हम सभी वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम अपने देश, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहेंगे और वीर साहिबज़ादों के बलिदान को कभी विस्मृत नहीं होने देंगे।

ओमप्रकाश जी शर्मा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली शिक्षा के उत्थान और विकास के लिए अमूल्य योगदान दे रहे हैं

निस्वार्थ भाव से तन मन धन से सेवा में संकल्पित है वे देश के अनेक स्थानों का प्रवास करते हैं उनका सपना है कि एक दिन हमारा देश भारत शिक्षा से आत्मनिर्भर अवश्य होगा जिसके लिए आप भागीरथी प्रयास कर रहे हैं।

 

*धुलकोट से दिलीप बामनिया की रिपोर्ट*

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