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मैहर में जन-आस्था का सैलाब _नारायण त्रिपाठी के जन्मदिन पर अनापेक्षित भीड़ विंध्य प्रदेश आंदोलन को दिशा

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मैहर में जन-आस्था का सैलाब
_नारायण त्रिपाठी के जन्मदिन पर अनापेक्षित भीड़
विंध्य प्रदेश आंदोलन को दिशा
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(कमलेश पाण्डेय)
मैहर। गुरुवार को मैहर में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम ने क्षेत्रीय राजनीति में जन-विश्वास और जन-आस्था की भूमिका को रेखांकित किया। पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी के जन्मदिवस पर होटल मैहर इन में आयोजित इस कार्यक्रम में मैहर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित हुए। कार्यक्रम के लिए न कोई औपचारिक निमंत्रण जारी किया गया और न कोई प्रचार अभियान चलाया गया। इसके बावजूद आयोजकों की अपेक्षा से कहीं अधिक संख्या में लोग पहुंचे। अनपेक्षित भीड़ हो गई और निर्धारित स्थान खचाखच भरा रहा। यह स्थिति बताती है कि पद के अभाव में भी सार्वजनिक विश्वास बना रह सकता है।
उपस्थित जनसमूह से यह स्पष्ट हुआ कि नारायण त्रिपाठी के प्रति लोगों का लगाव किसी पद या संगठन की परिधि से बंधा नहीं है। यह लगाव निरंतर जनसंपर्क, संवाद और कर्म पर आधारित है। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक, प्रशासन-न्यायपालिका से जुड़े प्रतिनिधि, शिक्षा-व्यापार के लोग तथा बड़ी संख्या में महिलाएं एवं युवा सम्मिलित हुए।


संतवाणी एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के पश्चात नारायण त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्होंने राजनीति को सदैव “जनसेवा का माध्यम” माना है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों में विघटन की प्रवृत्ति, विरोध की आवाज को सीमित करने के प्रयास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर उठ रहे प्रश्न गंभीर विषय हैं। संघीय ढांचे में राज्यों की भूमिका पर भी पुनर्विचार आवश्यक है।
ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि विंध्य प्रदेश 1956 के राज्य पुनर्गठन से पूर्व एक अलग प्रशासनिक इकाई था। विलय के पश्चात भी यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध रहा, परंतु विकास के अनेक मानकों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। संविधान के अनुच्छेद तीन के अंतर्गत संसद को नए राज्य के गठन का अधिकार प्राप्त है। तेलंगाना के गठन के बाद यह विषय पुनः चर्चा में आया है।
इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने पृथक विंध्य प्रदेश के गठन की मांग को व्यवस्थित एवं संविधानसम्मत आंदोलन का रूप देने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रयास किसी चुनावी उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता एवं संतुलित विकास की आवश्यकता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सवाल नहीं आप सहयोग और आशीर्वाद चाहिए। कार्यकर्ताओं से जनसेवा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
पूर्व विधायक श्री त्रिपाठी ने कहा कि ‘पद आते-जाते रहते हैं, परंतु जनसेवा का संकल्प स्थायी होना चाहिए।’
मैहर में जन-उपस्थिति का यह पहला अवसर नहीं है। 18 जून 2017 को नारायण त्रिपाठी के जन्म दिवस के अवसर पर मैहर’आओ जाने मध्य प्रदेश’ सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था, जिसमें प्रदेश भर के विद्यार्थियों ने भाग लिया था। उस आयोजन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला था। कल का कार्यक्रम उस परंपरा की अगली कड़ी के रूप में देखा गया।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनों ने नारायण त्रिपाठी को जन्मदिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अनेक नागरिकों ने उनसे भेंट कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
राजनीति प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने दृष्टिकोण से करता है, परंतु नारायण त्रिपाठी की राजनीति का अंदाज भिन्न प्रतीत होता है। यह कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। लोगों में उनके प्रति सम्मान, अपनत्व और विश्वास की भावना देखी गई। इस आयोजन को जिसने भी देखा, वह उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका। मैहर का यह आयोजन एक सभा से बढ़कर एक परिवार के रूप में परिवर्तित हो गया था।
नारायण त्रिपाठी का राजनीतिक सफर दल की सीमाओं से ऊपर उठकर देखा गया है। दल से बड़ा व्यक्ति होता है,इस कार्यक्रम में सिद्ध हुआ। लोकतंत्र में नेता वह नहीं जो केवल पद पर आसीन हो, नेता वह है जिसे जनता अपने हृदय में स्थान दे। राजनीतिक क्षेत्र में यह कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया।

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