RTI में लापरवाही भारी पड़ि करजी पंचायत के पूर्व सचिव पर ₹25,000 का जुर्माना, विभागीय जांच के आदेश; राज्य सूचना आयोग ने दिया सख्त संदेश
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RTI में लापरवाही भारी पड़ि करजी पंचायत के पूर्व सचिव पर ₹25,000 का जुर्माना, विभागीय जांच के आदेश; राज्य सूचना आयोग ने दिया सख्त संदेश
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प्राईम संदेश कोरिया छत्तीसगढ़
स्टेट हेड अजीमुदिन अंसारी
बैकुण्ठपुर (कोरिया)। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को वर्षों तक लंबित रखना ग्राम पंचायत करजी के पंचायत सचिव एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (PIO) जयप्रताप सिंह को महंगा पड़ गया। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारी पर ₹25,000 का अधिकतम अर्थदंड अधिरोपित किया है। साथ ही जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को उनके विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन द्वारा पारित इस आदेश को सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी, समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराना तथा आयोग के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
15वें वित्त आयोग के विकास कार्यों का मांगा था पूरा ब्यौरा
अपील प्रकरण क्रमांक A/5209/2023 के अनुसार, पटना परसापारा निवासी प्रिंसु पाण्डेय ने 9 अक्टूबर 2022 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में ग्राम पंचायत करजी में वर्ष 2020 से 2022 के दौरान 15वें वित्त आयोग (XVFC) के अंतर्गत प्राप्त राशि तथा उससे कराए गए विकास कार्यों का विस्तृत विवरण मांगा गया था।
आवेदक ने स्वीकृत कार्यों की सूची, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, स्वीकृत बजट, निर्माण कार्यों के प्रमाणित रेखाचित्र (ड्रॉइंग), भुगतान संबंधी अभिलेख, लेजर रजिस्टर, मस्टररोल, उपयोगिता प्रमाण-पत्र तथा कार्यों का भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारियों के नाम सहित विभिन्न दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
30 दिन में सूचना नहीं मिली, प्रथम अपील के आदेश की भी अनदेखी
आरटीआई अधिनियम के अनुसार निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद आवेदक ने प्रथम अपील दायर की। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर ने फरवरी 2023 में आदेश पारित कर आवेदक को नियमानुसार निःशुल्क सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन संबंधित जन सूचना अधिकारी ने इस आदेश का भी पालन नहीं किया।
आयोग के नोटिस के बाद भी नहीं बदला रवैया
मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचने पर आयोग ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किए। सुनवाई के दौरान भी आयोग को संतोषजनक लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम सुनवाई तक भी आवेदक को मांगी गई संपूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
आयोग ने अपने आदेश में माना कि जन सूचना अधिकारी द्वारा बिना किसी वैध कारण के सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तथा आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों और आयोग के निर्देशों की अवहेलना की गई।
आयोग ने लगाए तीन बड़े निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत पंचायत सचिव एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी जयप्रताप सिंह पर ₹25,000 का अधिकतम अर्थदंड अधिरोपित किया। आयोग ने जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देशित किया कि उक्त राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से नियमानुसार वसूलकर शासन के खाते में जमा कराई जाए।
इसके साथ ही आरटीआई अधिनियम की धारा 20(2) के अंतर्गत जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने यह भी आदेशित किया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अपनी प्रत्यक्ष निगरानी में 30 दिनों के भीतर आवेदक प्रिंसु पाण्डेय को मांगी गई समस्त सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराएं तथा आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सूचना उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब, आदेशों की अवहेलना तथा पारदर्शिता में बाधा डालने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आर्थिक दंड के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
यह निर्णय सरकारी कार्यालयों और पंचायत स्तर पर कार्यरत जन सूचना अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट संकेत है कि आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। लापरवाही या उदासीनता बरतने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई से बचा नहीं जा सकेगा।