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एसपी सत्य नारायण की खामोश निगरानी में बेनकाब हुआ फर्जी लूटकांड, उधारी से बचने को रची गई थी सनसनीखेज स्क्रिप्ट,वादी ही निकला अपराध का लेखक

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News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी

कौशाम्बी : जनपद कौशाम्बी के थाना पश्चिम शरीरा क्षेत्र में दर्ज एक कथित लूट की सनसनीखेज घटना उस समय पूरी तरह बेनकाब हो गई, जब पुलिस अधीक्षक सत्य नारायण ने मामले को सामान्य मानने के बजाय साइलेंट इन्वेस्टिगेशन की रणनीति अपनाई। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिस व्यक्ति ने स्वयं को पीड़ित बताकर लूट की सूचना दी थी, वही फर्जी घटना का मास्टरमाइंड निकला।
यह मामला केवल झूठी सूचना देने का नहीं, बल्कि पुलिस को गुमराह कर कर्ज से बचने की साजिश का था। एसपी सत्य नारायण ने शुरुआत से ही घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच को तकनीकी और तथ्यात्मक आधार पर आगे बढ़ाया।
लूट का दावा,बाइक, छत, रस्सी और डरावनी कहानी
दिनांक 02 मई 2026 को विमल कुमार उर्फ गोपाल जी निवासी कस्बा पश्चिम शरीरा ने थाना पश्चिम शरीरा में तहरीर देकर बताया कि जजौली गेट के सामने कुछ अज्ञात बदमाशों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर एक निर्माणाधीन मकान में ले गए। आरोप था कि बदमाशों ने उसे छत पर चढ़ाकर चैन व नकदी लूट ली, इसके बाद रस्सी से बांधकर पिलर से लटकाया और मौके से फरार हो गए।शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके बाद मामला क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
एसपी की रणनीति, कहानी नहीं, सबूतों की भाषा पढ़ी
पुलिस अधीक्षक सत्य नारायण के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने घटना की जांच भावनात्मक बयानों के बजाय तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर शुरू की।जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस इनपुट और स्थानीय पूछताछ के जरिए तथ्यों की परतें खोली गईं। इसी दौरान कथित लूट की कहानी में लगातार विरोधाभास सामने आने लगे।पुलिस जांच में यह भी पता चला कि वादी विमल की दुकान के सामने अरविंद यादव (टेवां) का घर है और दोनों के बीच पैसों का लेन-देन चल रहा था।
सच का विस्फोट,50 हजार की उधारी छिपाने को रचा गया था ड्रामा
गहन जांच में खुलासा हुआ कि विमल ने दिनांक 16 दिसंबर 2025 को अरविंद यादव से 50 हजार रुपये उधार लिए थे। अरविंद लंबे समय से अपने पैसे की मांग कर रहा था। इसी दबाव से बचने के लिए विमल ने झूठी लूट की स्क्रिप्ट तैयार की।जांच में सामने आया कि विमल ने अरविंद को धमकी तक दी थी कि यदि उसने पैसे मांगे तो उसे इसी मुकदमे में फंसा देगा।जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो विमल ने स्वीकार किया कि उसके ऊपर विभिन्न स्थानों से कुल 6.5 लाख रुपये का कर्ज है और वह भुगतान करने में असमर्थ है। इसी कारण उसने खुद को लूटा हुआ दिखाकर झूठी कहानी रच दी।
वादी ही निकला आरोपी, पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और स्वीकारोक्ति के आधार पर वादी को ही आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया।मामले में आवश्यक धाराएं संशोधित कर आरोपी को न्यायालय भेजने की कार्रवाई की गई। गिरफ्तार आरोपी विमल कुमार उर्फ गोपाल जी पुत्र लक्ष्मी प्रसाद केशरवानी निवासी कस्बा पश्चिम शरीरा, थाना पश्चिम शरीरा, जनपद कौशाम्बी के विरुद्ध मु0अ0सं0,0801/2026,धारा 316(2), 217(ख), 248(ख), 308(7) बीएनएस का मुकदमा दर्ज किया गया।
एसपी सत्य नारायण की सतर्कता से फर्जीवाड़ा हुआ उजागर
पुलिस अधीक्षक सत्य नारायण की सतर्कता और खामोश निगरानी की रणनीति ने इस फर्जी लूटकांड की सच्चाई सामने ला दी। पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल झूठे मुकदमों पर रोक लगाने का संदेश गया, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि कानून व्यवस्था को गुमराह करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

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