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एलपीजी वितरकों ने खोला मांगों को लेकर मोर्चा, पहले धरना-प्रदर्शन फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

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News By-नितिन केसरवानी

होम डिलीवरी और प्रशासनिक शुल्क में 75 रुपये की वृद्धि समेत कई मांगों को लेकर बिसारा में जुटे जिलेभर के गैस वितरक, आंदोलन को सफल बनाने का लिया संकल्प

कौशाम्बी: एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के आह्वान पर प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन को सफल बनाने के लिए शुक्रवार को कौशांबी जिले के एलपीजी वितरकों ने बिसारा स्थित एक निजी होटल में बैठक की। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों और प्रतिनिधियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। वितरकों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पहले धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और इसके बाद जिलेभर के एलपीजी वितरक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

बैठक में वितरकों ने अपनी आर्थिक और व्यावसायिक समस्याओं को विस्तार से उठाते हुए केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। वक्ताओं का कहना था कि बढ़ती लागत, कर्मचारियों के खर्च और उपभोक्ताओं तक गैस सिलेंडर पहुंचाने की जिम्मेदारियों के बीच मौजूदा भुगतान व्यवस्था में वितरकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से मांगें उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने से वितरकों में नाराजगी बढ़ रही है।

होम डिलीवरी और प्रशासनिक शुल्क में 75 रुपये बढ़ाने की मांग

बैठक में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीयूष राय ने कहा कि एलपीजी वितरकों की प्रमुख मांगों में होम डिलीवरी एवं प्रशासनिक शुल्क में तत्काल 75 रुपये की वृद्धि शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वितरण संबंधी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में वितरकों को उचित शुल्क दिया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने ई-केवाईसी प्रक्रिया के लिए प्रति ई-केवाईसी 236 रुपये का भुगतान किए जाने की मांग उठाई। उनका कहना था कि ई-केवाईसी की जिम्मेदारी निभाने में एजेंसियों को अतिरिक्त संसाधन और कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इस कार्य का उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए।

पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त करने और नए कनेक्शन जारी करने की मांग

प्रदेश अध्यक्ष ने पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा नए एलपीजी कनेक्शन तत्काल जारी किए जाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि एलपीजी वितरण से जुड़ी नीतियों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे वितरकों के कारोबार और उपभोक्ताओं की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे। इसके अलावा एफटीएल एनडी, एनएफआर एआरबी की जबरन बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। वितरकों का कहना था कि ऐसी व्यवस्थाओं से एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उनकी व्यावसायिक समस्याएं बढ़ती हैं।

मांगों की अनदेखी पर बढ़ रहा आक्रोश

एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष लाल प्रताप विश्वकर्मा ने कहा कि वितरक लंबे समय से अपनी मांगों को संबंधित स्तर पर उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं हुआ है। लगातार अनदेखी के चलते जिले के गैस वितरकों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि अब सभी वितरक एकजुट होकर अपने अधिकारों और जायज मांगों के लिए आंदोलन करेंगे।

एसोसिएशन के महामंत्री प्रतीक कुमार केसरी और गौरव कुमार केसरवानी ने भी आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो जिले की सभी गैस एजेंसियों के वितरक एकजुट होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा। इसके बावजूद समाधान नहीं होने पर हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।

गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका, उपभोक्ताओं की बढ़ सकती है परेशानी

बैठक में मौजूद जिलेभर के गैस एजेंसी संचालकों और प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिया। सभी ने एकजुट होकर एसोसिएशन के निर्णय के अनुरूप आगे की रणनीति पर काम करने की बात कही।

वितरकों की ओर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी के बाद जिले में एलपीजी गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि आंदोलन के दौरान गैस वितरण का काम बाधित होता है तो घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल हड़ताल की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

बैठक में लिए गए निर्णय से स्पष्ट है कि एलपीजी वितरक अब अपनी मांगों को लेकर व्यापक आंदोलन की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में संबंधित विभागों और सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर जिले के गैस वितरकों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की भी नजर रहेगी।

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