रोंढ़ा से लंदन तक—ताप्ती संरक्षण की आवाज ने लगाई लंबी छलांग
42 वर्षों की पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान, ‘लंदन हेराल्ड’ में डॉ. रामकिशोर पंवार पर तीन पृष्ठीय सचित्र आलेख प्रकाशित
रोंढ़ा से लंदन तक—ताप्ती संरक्षण की आवाज ने लगाई लंबी छलांग
42 वर्षों की पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान, ‘लंदन हेराल्ड’ में डॉ. रामकिशोर पंवार पर तीन पृष्ठीय सचित्र आलेख प्रकाशित

बैतूल। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि मां सूर्यपुत्री ताप्ती नदी के जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढ़ावाला की जीवनी को यूनाइटेड किंगडम से प्रकाशित डिजिटल ई-मैगजीन ‘लंदन हेराल्ड’ ने अपने अगस्त 2026 के अंक में प्रमुखता से स्थान दिया है।
लंदन हेराल्ड के स्पेशल आर्टिकल क्रमांक 125/2026 में डॉ. पंवार पर अंग्रेजी भाषा में तीन पृष्ठों का सचित्र आलेख प्रकाशित किया गया है। इसमें उनकी 42 वर्षों की पत्रकारिता यात्रा, लेखन, सामाजिक सरोकारों तथा विशेष रूप से ताप्ती नदी के जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया है। आलेख में उनकी पत्रकारिता और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी कई तस्वीरें भी प्रकाशित की गई हैं।
छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
बैतूल जिले के छोटे से गांव रोंढ़ा में 23 मई 1964 को जन्मे डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार ने पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहते हुए स्थानीय मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने का प्रयास किया है। ताप्ती नदी को लेकर उनका जल संरक्षण अभियान उनके सामाजिक सरोकारों की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है।
उनके इसी कार्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने से बैतूल की ताप्ती नदी और उसके संरक्षण से जुड़े प्रयासों को वैश्विक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला है।
जल संरक्षण कार्यों के लिए मानद डॉक्टरेट
डॉ. पंवार के जल संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कार्यों को इससे पहले भी सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2025 में ज्ञानदान ऑनरेरी डॉक्टरेट अवार्ड्स फाउंडेशन, दिल्ली से संबंधित संस्था द्वारा उन्हें जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई थी।
पत्रकारिता से लेखन तक लंबा सफर
डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार पत्रकारिता के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय रहे हैं। वे लगभग एक दर्जन पुस्तकों के लेखक हैं। लंदन हेराल्ड के प्रकाशित आलेख में उनकी पत्रकारिता और लेखकीय योगदान को भी विशेष महत्व दिया गया है।
पत्रिका के संपादक डॉ. अविनाश संकुडे ने ई-मेल के माध्यम से डॉ. पंवार को उनके ऊपर प्रकाशित इस विशेष आलेख की जानकारी दी। अगस्त 2026 का यह अंक अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित हुआ है और अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में बाजार में उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
‘बैतूल’ की कहानी को वैश्विक मंच
लंदन हेराल्ड के कवर पर “A Chronicler of Betul” शीर्षक के साथ डॉ. रामकिशोर दयाराम पंवार को पत्रकार, लेखक और बदलाव के पक्षधर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कवर स्टोरी में उनके कार्यों को “Rivers. People. Heritage.” और “Beyond Journalism” जैसे विचारों के माध्यम से रेखांकित किया गया है।
बैतूल की ताप्ती नदी, उसके जल, पर्यावरण और स्थानीय समाज से जुड़े मुद्दों को लंबे समय से उठाने वाले एक पत्रकार की जीवन-यात्रा का अंतरराष्ट्रीय डिजिटल पत्रिका में प्रकाशित होना जिले के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है।
डॉ. पंवार पर प्रकाशित यह विशेष आलेख केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बैतूल की पत्रकारिता, ताप्ती नदी और जल संरक्षण की स्थानीय मुहिम को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
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रोंढ़ा से लंदन तक—ताप्ती के जल प्रहरी की लंबी छलांग
ताप्ती के संरक्षण की आवाज पहुंची लंदन तक—एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच की लंबी छलांग
ताप्ती के तट से लंदन की उड़ान—रोंढ़ा के पत्रकार की लंबी छलांग
एक छोटे से गांव रोंढ़ा से लंदन तक—ताप्ती संरक्षण की आवाज ने लगाई लंबी छलांग
ताप्ती की धारा से लंदन की दहलीज तक—रोंढ़ा से निकली एक लंबी छलांग
ताप्ती के जल संरक्षण से लंदन हेराल्ड तक—रोंढ़ा के डॉ. रामकिशोर पंवार की लंबी छलांग