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बड़ी खबर:धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

धर्म बदलते ही छिन जाएगा अनुसूचित जाति का आरक्षण और लाभ।

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बड़ी खबर:धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

 

धर्म बदलते ही छिन जाएगा अनुसूचित जाति का आरक्षण और लाभ।

 

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खो देता है

 

सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खो देता है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के अप्रैल 2025 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धर्म बदलने के बाद, अगर व्यक्ति के पास पुराना जाति प्रमाण पत्र है भी, तो वह मान्य नहीं होगा और उसका लाभ नहीं ले सकता। धर्मांतरित व्यक्ति अब अत्याचार निवारण (SC/ST Act) के तहत विशेष संरक्षण का दावा भी नहीं कर सकता।

 

अपडेट…

 

नई दिल्ली:हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाने वाले ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं. ईसाई आदि, किसी अन्य धर्म में कन्वर्ट होने पर व्यक्ति अपना अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा. ये ऐतिहासिक फैसला है सुप्रीम कोर्ट का. जस्टिस पी.के. मिश्रा और एन.वी. अंजारी की बेंच ने फैसला सुनाया कि ईसाई धर्म में कन्वर्ट होने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का लाभ नहीं ले सकेगा.

 

कन्वर्जन पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा. कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता. अदालत ने साफ किया कि ईसाई बने व्यक्ति को SC/ST एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा.

 

 

ईसाई बनने पर SC/ ST का दर्जा खत्म हो जाएगा

 

सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में कन्वर्ट हो जाता है, उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता और वह SC/ ST Act, 1989 के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकता. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस ए वी अंजारिया की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति ईसाई धर्म अपना चुका है और सक्रिय रूप से उसका पालन करता है, वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता. पादरी चिंथदा आनंद के आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया.

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