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कोशल विकास,शोध और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माँ नर्मदा महाविद्यालय की सशक्त पहल* राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं एमएनडीसी क्रॉनिकल्स का भव्य शुभारंभ

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लोकेशन धामनोद

संवाददाता मोनू पटेल

 

 

*कोशल विकास,शोध और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माँ नर्मदा महाविद्यालय की सशक्त पहल*

 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं एमएनडीसी क्रॉनिकल्स का भव्य शुभारंभ

 

धामनोद, दिनांक — माँ नर्मदा महाविद्यालय, धामनोद में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अत्यंत गरिमा, उत्साह और वैज्ञानिक चेतना के वातावरण में संपन्न हुआ। इस वर्ष की थीम “आत्मनिर्भर विकसित भारत के लिए विज्ञान में महिला सशक्तिकरण” रही, जिसने विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाओं की सशक्त और प्रभावी भागीदारी को केंद्र में रखा। यह आयोजन मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा प्रवर्तित एवं अनुदानित रहा।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ, जिससे वातावरण में ज्ञान, आस्था और उल्लास का समन्वित संचार हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अजय कुमार (निदेशक, मेवाड़ यूनिवर्सिटी) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरपर्सन डॉ. मनोज नाहर ने की। विशिष्ट अतिथियों में डायरेक्टर रीना नाहर, डॉ. वीणा बर्डे, प्राचार्य डॉ. प्रिया त्रिवेदी, डॉ. सैमुअल पॉल राज एवं डॉ. पंकज पाटीदार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में चेयरपर्सन ने कहा कि “विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करता है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित करना ही उच्च शिक्षा का मूल उद्देश्य है।” उन्होंने महिला सशक्तिकरण को आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताते हुए युवाओं से विज्ञान को समाजोपयोगी बनाने का आह्वान किया। उनके विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों में नवाचार और अनुसंधान के प्रति नई प्रेरणा का संचार किया।

 

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए रंगोली निर्माण, निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण, वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं विज्ञान प्रदर्शनी जैसी विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया। विजेताओं को नकद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ व्यक्त की गईं।

 

द्वितीय दिवस पर “विज्ञान, अभियांत्रिकी, प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन में नवीन प्रगति” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अजय सिंह निदेशक मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने शोध की बारीकियों, प्रभावी शोध-पत्र प्रस्तुति की तकनीकों तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “उत्कृष्ट शोध ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार होता है, अतः युवा शोधार्थियों को मौलिकता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”

 

अति विशिष्ट अतिथि के रूप में फरज़ानेह हरातयान, सह प्राध्यापक, जिलिन इंटरनेशनल स्टडीज़ यूनिवर्सिटी ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधुनिक आयामों, वैश्विक सहयोग और बहुआयामी अनुसंधान की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “वैश्विक दृष्टिकोण के साथ किया गया अनुसंधान ही विश्व पटल पर भारत का परचम लहराएगा।”

 

सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित तकनीकी सत्रों में विभिन्न शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट शोध-पत्र प्रस्तुति हेतु प्रभात पांडे एवं शुभम पाटीदार को सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तोता के रूप में सम्मानित किया गया। सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किए गए तथा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

 

इस अवसर पर महाविद्यालय की मासिक एवं द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेज़ी) समाचार-पत्रिका “एमएनडीसी क्रॉनिकल्स” का भव्य शुभारंभ भी किया गया। यह पत्रिका महाविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं नवाचार संबंधी गतिविधियों को व्यापक मंच प्रदान करते हुए विद्यार्थियों की सृजनात्मकता को नई दिशा देगी।

 

कार्यक्रम के समापन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें मीडिया प्रतिनिधियों को आयोजन की उपलब्धियों, शैक्षणिक उद्देश्यों एवं भावी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अंत में प्राचार्य डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे ज्ञान, प्रेरणा और वैज्ञानिक चेतना का उत्सव बताया।

 

दो दिवसीय यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ, जिसने महाविद्यालय परिसर में गर्व, उत्साह और नवाचार की उज्ज्वल आभा बिखेर दी।

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