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खातला की शालाओं में पानी का संकट: हैडपंप पर निर्भर बच्चों की प्यास, शिक्षा विभाग बेखबर

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*धुलकोट। बुरहानपुर*

 

*संवाददाता दिलीप बामनिया*

 

खातला की शालाओं में पानी का संकट: हैडपंप पर निर्भर बच्चों की प्यास, शिक्षा विभाग बेखबर

धुलकोट ।

 

धुलकोट क्षेत्र की ग्राम पंचायत खातला की प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में इन दिनों पीने के पानी की गंभीर समस्या सामने आई है। विद्यालयों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर दूर स्थित हैडपंप से पानी भरकर लाना पड़ता है। यह स्थिति न केवल बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान पैदा कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय बन गई है।

 

पिछले कई महीनों से स्कूलों में जल की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। विद्यालयों में न तो नल कनेक्शन है और न ही जल संरक्षण की कोई व्यवस्था। पीने के पानी की अनुपलब्धता के कारण बच्चों को तपती दोपहर में स्कूल से बाहर जाकर हैडपंप से पानी लाना पड़ता है। कई बार छोटे बच्चों को भी हैडपंप की लाइन में लगना पड़ता है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।

 

स्कूल में लगी पुरानी टंकी अब उपयोग लायक नहीं रही है। वर्षों से यह खराब पड़ी है और अब तक मरम्मत या बदलाव की कोई पहल नहीं की गई है। कई बार बच्चों को बिना पानी के ही दिन गुजारना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

 

धुलकोट क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। इससे पहले भी शालाओं में शौचालय की व्यवस्था, बैठने की पर्याप्त जगह और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दे उजागर हो चुके हैं, लेकिन किसी तरह की ठोस पहल अब तक नहीं हो पाई है।

 

बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि शासन बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने की बात करता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। जब तक स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं होंगी, तब तक शिक्षा का स्तर सुधारने की बात केवल कागजों तक सीमित रहेगी।

 

हर बार निरीक्षण और कार्यवाही के केवल आश्वासन ही दिए जाते हैं, लेकिन अब तक नतीजे के रूप में कुछ नहीं हुआ है। सरकारी मशीनरी की यह उदासीनता ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

 

खातला की प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में पीने के पानी की समस्या एक गंभीर मामला है, जिसे नज़रअंदाज करना बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ अन्याय है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह प्राथमिकता के आधार पर इन शालाओं में जल व्यवस्था की समुचित व्यवस्था करे ताकि बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

 

*धुलकोट। संवाददाता दिलीप बामनिया*

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