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प्रभारियों के हवाले मझौली उपखंड के अधिकांश विभागों की कमान।

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प्रभारियों के हवाले मझौली उपखंड के अधिकांश विभागों की कमान।

 

भ्रष्टाचार व कमीशन खोरी को भारी पैमाने पर दे रहे अन्जाम।

 

*अरविंद सिंह परिहार सीधी*

 

विगत कुछ वर्षों से मझौली उपखंड के अधिकांश विभाग की कमान प्रभारियों के हवाले कर रखी गई है जहां नगर व ग्राम विकास की राशि तथा शासन की जनकल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाएं भ्रष्टाचार व कमीशन खोरी की भेंट चढ़ रही हैं।

बताते चले की इन दिनों मझौली उपखंड के अन्य छोटे विभाग जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि के साथ प्रमुख विभाग नगर परिषद मझौली एवं जनपद पंचायत मझौली की कमान भी नियम कानून को दरकिनार करते हुए प्रभारियों के हवाले कर रखें है। जहां भारी भ्रष्टाचार एवं कमीशन खोरी का खेल खेला जा रहा है। एक ओर जहां घटिया निर्माण कार्य कराया जाकर नगर विकास व ग्राम विकास की राशि बंदर बांट की जा रही है वही केंद्र एवं राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं कमीशन व घोषखोरी की भेंट चढ़ रही हैं। जिनकी फरियाद लिए लोग यहां वहां भटक रहे हैं लेकिन इनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं मिल रहा।

 

*फीडर कैडर कर्मचारी के हवाले नगर मझौली की कमान*

 

प्रभारी सीएमओ अजय कुमार गुप्ता के (मूल पद राजस्व उप निरीक्षक) विगत 30 जून को सेवानिवृत हो जाने पर कई वर्षों से अंगद की तरह पांव जमाए मझौली नगर परिषद में पदस्थ फीडर कैडर कर्मचारी सहायक वर्ग 01 (लेखा पाल ) अमित कुमार सिंह को सीएमओ की कमान सौंपी गई है जिनके द्वारा जमकर नगर विकास व नगर व्यवस्था की राशि हजम किए जाने मामला प्रकाश में आ रहा है जानकारों की माने तो नियम विरुद्ध तरीके से इनको प्रभारी सीएमओ की कमान सौंपी गई है। सीएमओ का प्रभार नगर के राजस्व अधिकारियों -कर्मचारियों को ही देने का है। लेकिन 6 महीने से ऊपर हो गया है अभी तक सीएमओ की पदस्थापन नहीं की जा सकी है।अब देखना होगा की खबर प्रकाशन के बाद शासन प्रशासन यहां पर किसी फ्रेश सीएमओ की पदस्थापन कर जारी भ्रष्टाचार एवं कमीशन खोरी में लगाम लगाने की कवायत करेगी की भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी को अंजाम देने के लिए प्रभारियों को और अवसर प्रदान करती रहेगी।

 

 

*जनपद पंचायत सीईओ बना रखे हैं दूरी*

 

 

जब से प्रभारी सीईओ एस एन द्विवेदी को मझौली जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद से हटा मूल पद पर पदस्थित किया गया है तथा कमान ज्ञानेंद्र मिश्रा सीईओ कुसमी के हवाले की गई है भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। प्रभार लेने के बाद सीईओ मझौली से दूरी बनाए हुए हैं वहीं यहां पदस्थ अधिकारी कर्मचारी अधिकांश सीधी में डेरा डाल वेतन व कमीशन डकार रहे हैं। पंचायत कर्मी जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं यहां तक की लोगों को परेशान कर घूस बटोरने के लिए उनकी समग्र आईडी डिलीट कर रहे हैं तथा मृत घोषित कर रहे हैं जिसकी फरियाद लेकर दूर दराज से लोग जनपद पंचायत पहुंच रहे हैं लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं मिलता इन्हें इधर-उधर घुमा फिरा कर भगा दिया जाता है। कई महीना बीत जाने के बाद अभी तक मझौली में बैठने का दिन तय नहीं किया जा चुका है ना ही लोगों व मीडिया को सीईओ के आने की जानकारी दी जाती। अब लोग जाएं तो जाएं कहां।

 

*फ्लॉप होती दिख रही मनरेगा योजना*

 

गरीब मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा गांव में काम मिल सके इसके लिए भारत सरकार ने इंदिरा गांधी मनरेगा योजना संचालित कर रखी हैं जिसके लिए अलग से अधिकारी कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं लेकिन इनका कोई अता पता नहीं होता ज्यादातर पंचायत में मनरेगा योजना कार्यों में मशीनों का उपयोग कर काम कराए जा रहे हैं तथा सरपंच सचिव रोजगार सहायक अपने सगे संबंधियों तथा चाहेतो के नाम फर्जी मास्टर रोल तैयार गरीब मजदूरों की हक की राशि डकार अधिकारियों कर्मचारियों को मालामाल कर कर खुद मालामाल होते दिख रहे हैं। वर्तमान में भले ही चाहे फर्जी मास्टर रोलो जारी कर मजदूरों को कम पर लगे होना दिखाई जा रहा हो लेकिन अधिकांश पंचायत में एक भी मजदूर काम पर लगे नहीं देखे जा रहे हैं। क्षेत्र के गरीब मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए पलायन करना पड़ता है जिन्हें बाहर जान भी गंवानी पड़ रही है जिनके शव लाने तक के लिए शासन स्तर से कोई सहयोग राशि न मिलने से जन प्रतिनिधियों को लोगों से सहायता लेनी पड़ रही है।

 

*समय से नहीं पहुंचते अधिकारी कर्मचारी*

 

जनपद कार्यालय में नियमित सीईओ के ना होने से यहां तैनात अधिकारी- कर्मचारी जो जिले में डेरा डाले हैं जो मनमानी पूर्वक 12 बजे तक कार्यालय पहुंचते हैं तथा शाम चार बजे से पहले ही रवाना हो जाते हैं।

यहां तक कि अधिकांश अधिकारी -कर्मचारी जो जिले से ही ड्यूटी पका रहे हैं हफ्ते में एक -दो दिन ही कमीशन उगाही करने कार्यालय पहुंच रहे हैं।

 

 

 

*आर ई एस एसडीओ भी कर रही जिले में डेरा*

 

 

ग्रामीण सेवा यांत्रिकी विभाग की एसडीओ सरिता सिंह भी जिले में रहकर आपनी ड्यूटी पका रही हैं जिस कारण निर्माण कार्यों की देख देख सही ढंग से नहीं हो पा रही इनके अनुपस्थिति के कारण उपयंत्री भी कमरे में बैठे कमीशन और वेतन उठा रहे हैं। शायद इसी लापरवाही और मनमानी के कारण जल संरक्षण और संवर्धन के लिए लाखों के लागत से निर्माण कराए गए चेक डैम धराशाही हो चुके हैं।

 

*राजस्व विभाग तक सिमट कर रह गई जनसुनवाई*

 

 

पूर्व में जहां जनसुनवाई में सभी विभागों के अधिकारी कर्मचारी मौजूद होते थे जिससे दूर दराज से आने वाले लोगों के 50 फिसादी फरियादों का समाधान मौके पर हो जाया करता था लेकिन विगत कुछ लोगों से जनसुनवाई से भी विभागीय अधिकारी कर्मचारी दूरी बनाए रहते हैं देखा जाए तो हर मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई राजस्व विभाग तक सिमट कर रह गई है। भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी को अंजाम देने वाले तथा मनमानी पूर्वक कार्य करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्यवाही करने में जिम्मेदार अधिकारी बेबस दिख रहे हैं। आखिर बेबस्ता में किसका असर हावी है राजनीतिक दबाव या कमीशन का प्रभाव।

 

**कार्यालय में नहीं अंकित है कर्मचारियों की जानकारी*

 

जिले जिले के कार्यालय में विधिवत अधिकारियों कर्मचारियों के नाम एवं मोबाइल नंबर अंकित मिल रहे हैं लेकिन मझौली उपखंड में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं देखी जा रही है प्रमुख कार्यों में भले ही चाहे योजनाओं के बड़े-बड़े बोर्ड व पोस्ट लगाए गए हैं दीवारों में पेंटिंग कर रखी गई हो लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों की ना तो उपस्थित रहती ना ही मोबाइल नंबर मिल पा रहा है यहां तक की यहां की कर्मचारियों के पास भी अधिकारियों के नंबर नहीं होते इससे पता लगाया जा सकता है कि योजनाओं का क्रियान्वयन किस हिसाब से किया जा रहा है।

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