जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आगे झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
नई दिल्ली – देश की राजधानी में महीनों से गर्माया राजनीतिक और सामाजिक माहौल आज एक बड़े मोड़ पर पहुँच गया है। जंतर-मंतर पर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे ‘सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के चौतरफा दबाव के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना ही पड़ा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।_
इसे हाल के दिनों में जन-आंदोलन और नागरिक संगठनों की सबसे बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या हैं इस बड़े इस्तीफे के मायने?
CJP का अटूट आंदोलन:CJP के बैनर तले छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। उनकी लगातार मांग और तीखे विरोध के कारण सरकार पर भारी दबाव बन रहा था।
संसद से सड़क तक हंगामा:इस मुद्दे की गूंज न सिर्फ सड़कों पर बल्कि संसद के गलियारों तक में सुनाई दे रही थी, जिसने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया।
इस्तीफे की नैतिक जिम्मेदारी:सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते दबाव और आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सौंप दिया है।_
आंदोलनकारियों में खुशी की लहर
जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर जंतर-मंतर पहुँची, वहाँ मौजूद CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि:यह सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह देश के आम नागरिकों और छात्रों के संघर्ष की जीत है। जब-जब जनता एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगी, सत्ता को झुकना ही पड़ेगा।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि:
अगला शिक्षा मंत्री कौन होगा?
CJP की अन्य बची हुई मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है?*
_सरकार के इस कदम से यह साफ हो गया है कि जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि इसने सत्ता के समीकरण हिलाकर रख दिए हैं।