RNI की धज्जियां उड़ाते फर्जी अखबार का धंधा, इंदौर में ब्लैकमेलिंग का काला कारोबार
भारत सरकार के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय के नियम की उड़ रही धज्जियां
RNI की धज्जियां उड़ाते फर्जी अखबार का धंधा, इंदौर में ब्लैकमेलिंग का काला कारोबार
भारत सरकार के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय के नियम की उड़ रही धज्जियां
फर्जी पत्रकार अधिकारी, बिल्डर और व्यवसायियों को कर रहे ब्लैकमेल
मनीष कुमार राठौर
8109571743
भोपाल। मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में पत्रकारिता के नाम पर एक ऐसा कलंकित धंधा पनप रहा है, जिसने देश के चौथे स्तंभ की गरिमा को तार-तार कर दिया है। फर्जी पत्रकारों और पोर्टलों के बाद अब फर्जी समाचार पत्रों का गिरोह सक्रिय हो गया है, जो बिना किसी कानूनी पंजीयन के डिजिटल एडिशन के नाम पर लोगों को ब्लैकमेल कर रहा है और मनमानी उगाही कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कथित ‘अखबार’ भारत सरकार के समाचार पत्र पंजीयक (आरएनआई) के पंजीयन नंबर के बिना ही धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, यह फर्जी संस्थान बिना RNI पंजीयन के डिजिटल एडिशन के नाम पर समाचारों की पीडीएफ तैयार कर रहा है और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है। यह गिरोह न केवल मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक समाचार प्रकाशित कर रहा है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य अधिकारियों, बिल्डरों और व्यवसायियों को ब्लैकमेल करना है।
एक विश्वसनीय स्रोत ने खुलासा किया कि ये फर्जी पत्रकार शासकीय कार्यालयों में जाकर अधिकारियों से अड़ी-बाजी कर रहे हैं और बदनामी की धमकी देकर वसूली कर रहे हैं। वहीं, बाजार से निजी विज्ञापन लेकर अखबार के नाम पर उगाही का धंधा चल रहा है। पत्रकारिता के इस कलंक ने इंदौर शहर को शर्मसार कर दिया है, जिसे भूल पाना नामुमकिन है।
शिकायत के बाद भी नहीं थमा आतंक
इस गिरोह के खिलाफ अब शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने मध्यप्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले से अवगत कराया है। शिकायत में कहा गया है कि इंदौर शहर में गुंडे और मवाली पत्रकार बनकर भोले-भाले लोगों को पत्रकारिता के सपने दिखा रहे हैं और उन्हें लूट रहे हैं। यह गिरोह झूठे केस में फंसाने और सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे ऐंठ रहा है।
क्या कहता है कानून?
गौरतलब है कि भारत में बिना RNI पंजीयन के कोई भी समाचार पत्र या पीरियोडिकल प्रकाशित नहीं किया जा सकता। हालांकि, पूरी तरह से डिजिटल न्यूज पोर्टल्स को आमतौर पर RNI पंजीयन की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि कोई प्रकाशन खुद को ‘अखबार’ या ‘समाचार पत्र’ कहता है और उसका प्रिंट या डिजिटल संस्करण नियमित रूप से प्रकाशित होता है, तो उसके लिए RNI पंजीयन अनिवार्य है। इस मामले में गिरोह इस कानूनी पेंच का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहा है।
अगले अंक में देखिए ।
इंदौर के कौन से समाचार पत्र हैं जो डिजिटल एडिशन के बदनाम कर रहे हैं पत्रकारिता को ?
कौन-कौन से पत्रकार हैं जो नियुक्ति के नाम पर ले रहे लाखों रुपए ?