भैंसदेही की 4 वर्षीय नन्हीं बालिका ने राम मंदिर में मधुर वाणी में सुनाई हनुमान चालीसा, सनातन धर्म की सजीव परंपरा पर गर्व
भैंसदेही की 4 वर्षीय नन्हीं बालिका ने राम मंदिर में मधुर वाणी में सुनाई हनुमान चालीसा, सनातन धर्म की सजीव परंपरा पर गर्व
भैंसदेही/मनीष राठौर
भैंसदेही मां पूर्णा की पावन नगरी भैंसदेही के बाजार चौक स्थित राम मंदिर में शनिवार को एक छोटी बच्ची ने हृदयस्पर्शी प्रदर्शन दिया, जिसे देखने और सुनने वालों ने भाव विभोर होकर प्रशंसा की। नंदिता शुक्ला की चार वर्षीया पुत्री (छोटी पुत्री) — जो सुखतवा, बैतूल में रहती हैं — ने मंदिर के समक्ष भक्ति-भाव से हनुमान चालीसा का मौखिक पाठ किया। नन्ही बच्ची वर्तमान में KG2 की छात्रा है और उनके नाना का नाम श्याम नारायण तिवारी है। पिता का नाम अजय शुक्ला है।
मंदिर में उपस्थित लोगों ने रिकार्ड किए वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा और सुना कि इतनी कम उम्र में भी बच्ची की वाणी कितनी मधुर, शुद्ध और संतोषजनक है। बच्चों की मासूमियत और भक्ति का मिश्रण उपस्थित दर्शकों के दिलों को छू गया और कई लोगों ने इसे सनातन धर्म के प्रति एक दुर्लभ और प्रेरणादायक उपलब्धि करार दिया।
स्थानीय निवासी और मंदिर के पुजारी ने बताया कि बच्ची नियमित रूप से माता-पिता के साथ मंदिर आती है और उसने अपने घर पर और स्कूली गतिविधियों के दौरान हनुमान चालीसा का अभ्यास किया है। गुरुजन और परिजन उसकी इस कला की तारीफ कर रहे हैं और कई लोग कह रहे हैं कि ऐसे दृश्यों से संस्कृति और धर्म की परंपराएँ जिंदा रहती हैं।
विशेषताएँ और प्रतिक्रिया:
बच्चों की आत्मीय भक्ति ने समारोह में शांति और श्रद्धा का माहौल बनाया।
वीडियो साझा होने पर सोशल मीडिया पर लोग इसे देखने लगे और इसकी प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों में धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला प्रेरक उदाहरण है।
परिजन आश्वस्त कर रहे हैं कि बच्ची अपनी पढ़ाई और सामान्य बचपन का आनंद भी ले रही है, वहीं परिवार उसकी प्रतिभा का समुचित संरक्षण और मार्गदर्शन कर रहा है।
इतनी छोटी उम्र में भक्ति और संस्कार का यह अनुपम उदाहरण स्थानीय समुदाय में गर्व का विषय बन गया है। भैंसदेही के राम मंदिर में हुए इस कार्यक्रम ने यह दिखाया कि धार्मिक परंपराएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहज रूप से संचरित हो सकती हैं, जब परिवार और समाज मिलकर बच्चों को संस्कार देते हैं।