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नगर परिषद बरगवां-अमलाई में फिर विवाद! भवन निर्माण पर उठे सवाल: जनता के हित में फैसला या चहेते ठेकेदारों का खेल?

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नगर परिषद बरगवां-अमलाई में फिर विवाद! भवन निर्माण पर उठे सवाल: जनता के हित में फैसला या चहेते ठेकेदारों का खेल?

 

अनूपपुर,

 

– नगर परिषद बरगवां-अमलाई एक बार फिर विवादों में है। वार्ड क्रमांक 5 की राजस्व भूमि रकबा नंबर 755 पर नगर परिषद भवन निर्माण को लेकर जनआक्रोश गहराता जा रहा है। पूर्व में जनविरोध, हस्ताक्षर अभियान और पार्षदों की एकजुटता से रोकी गई टेंडर प्रक्रिया अब एक बार फिर गुपचुप ढंग से शुरू कर दी गई है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं, बल्कि जनभावनाओं की सीधी अनदेखी भी सामने आ रही है।

 

 

टेंडर प्रक्रिया पर फिर छाया संदेह: क्या दोहराई जा रही है पुरानी गलती?

 

रकबा नंबर 755 नगर परिषद की स्वीकृत राजस्व भूमि है, जिसे पूर्व में परिषद भवन निर्माण के लिए चिह्नित किया गया था। लेकिन एक वर्ग विशेष के दबाव और राजनीतिक स्वार्थ के चलते यह काम रोक दिया गया था। अब एक बार फिर बिना सार्वजनिक सहमति और पार्षदों की स्पष्ट राय के, टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है — जिससे नगर में टकराव की स्थिति बन रही है।

 

वर्तमान भवन: अंतिम छोर पर, जनता को परेशानी का केंद्र

 

फिलहाल नगर परिषद भवन नगर के अंतिम छोर, शहडोल-अनूपपुर की सीमा पर स्थित है, जहाँ न पहुँचने के साधन हैं और न आपातकालीन स्थिति में सुगमता। तंग गलियों और रिहायशी बस्तियों से होकर कार्यालय तक पहुंचना आम नागरिकों और सरकारी वाहनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

रकबा 755: सबके लिए सुलभ और आदर्श विकल्प

 

वार्ड क्रमांक 5 की रकबा नंबर 755, मुख्य सड़क से जुड़ा हुआ क्षेत्र है जो पूरे नगर का केंद्र बिंदु बन सकता है। यह स्थान न केवल सभी वार्डों के लिए समान दूरी पर है, बल्कि फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस व अन्य आपातकालीन वाहनों की निर्बाध आवाजाही के लिए भी पूरी तरह उपयुक्त है। जनता की मांग है कि यहीं भवन बनाया जाए, जिससे विकास की धारा सबके लिए समान रूप से प्रवाहित हो।

 

 

राजनीतिक लाभ बनाम जनहित: जनप्रतिनिधियों का बड़ा आरोप

 

स्थानीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि वर्तमान में प्रस्तावित निर्माण योजना स्वार्थी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की साजिश है। पूर्व में जनविरोध के चलते जिस टेंडर को निरस्त किया गया था, अब फिर से उसी को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। यदि यह जनविरोधी कार्य दोहराया गया, तो बड़ा आंदोलन तय माना जा रहा है।

 

 

अब जनता का सवाल: जिला प्रशासन किसके साथ?

 

नगर की जनता और जनप्रतिनिधियों की निगाहें अब जिला प्रशासन और नगर परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या वे जनहित में निर्णय लेंगे और रकबा 755 को भवन निर्माण का स्थल बनाएंगे, या फिर रसूखदारों के इशारे पर जनता की आवाज़ को फिर दबाया जाएगा?

 

पूर्व में आंदोलन और जनआंदोलन के दबाव में टेंडर निरस्त हुआ था — अब यदि वही गलती दोहराई गई, तो जनसंघर्ष और तीव्र हो सकता है।

यह सिर्फ एक भवन निर्माण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता की पहुँच, पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है। आज जो निर्णय लिया जाएगा, वही नगर के विकास की दिशा तय करेगा। समय है कि प्रशासन जनहित को सर्वोपरि रखे, न कि निजी स्वार्थ को।”

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