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मोरघनिया नाला में बने चेक डेम से पानी को तरसते किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान

मोरघनिया नाला में बने चेक डेम से पानी को तरसते किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान

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*सफलता की कहानी*

 

*मोरघनिया नाला में बने चेक डेम से पानी को तरसते किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान*

 

*मनरेगा के तहत बने चेकडेम से 20 किसानों के 17 एकड़ भूमि में बढ़ी सिंचाई सुविधा

 

दैनिक

प्राईम संदेश छत्तीसगढ़

स्टेट हेड अजीमुद्दीन अंसारी

*एमसीबी/27 मई 2025/* किसान की मेहनत सफल तभी हो सकती है जब किसान के पास समय पर सिंचाई के लिए जल उपलब्ध हो। ग्राम पंचायत बरदर में नाले के किनारे रहने वाले कई किसानों के पास सिंचाई का संसाधन न होने से उन्हें अपने खेतों से मनचाहा लाभ नहीं मिल पाता था। गांव के किनारे बहने वाले नाले से पूरा बारिश का पानी बहकर आगे हसदेव नदी में जाकर मिलता था और उसके बाद गर्मी आते तक वह नाला पूरी तरह से जल विहीन हो जाता था। बारिश में खेतों मे कटाव करके बहने वाली बारिश का पानी बाद में सिंचाई तो दूर उनके पशुओं के लिए पेयजल भी नहीं दे पाता था। लेकिन बीते वित्तीय वर्ष में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत बनाए गए एक पक्के चेक डेम से अब गांव का एक कोना हर मौसम में हरा भरा रहता है। यहां आधा दर्जन किसान पंपों के सहारे अपने 17 एकड़ से अधिक खेतों में सिंचाई का लाभ लेते हुए दो फसलें और तीन फसलें तक लेने लगे हैं। मई की तपती गर्मी में भी बरदर के दर्जन भर किसानों के खेतों में उड़द की फसल लहलहा रही है। जिले के जनपद पंचायत खड़गवां का एक ग्राम पंचायत बरदर है। यहां गांव के किनारे से एक मोरघनिया नाला बहता है। यह एक बरसाती नाला है जिसमे बारिश में तो पर्याप्त जल रहता था। लेकिन बारिश खत्म होने के बाद से इसमें जल कम होने लगता था और गर्मी आते तक यह पूरी तरह से सूख जाता था। इस नाले को नरवा विकास के तहत चयनित कर इसका सर्वे किया गया और उपयुक्त जगह पर गत वर्ष एक पक्का चेक डेम बनाया जाना प्रस्तावित किया गया। ग्राम सभा से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार कार्य की स्वीकृति प्रदान करते हुए ग्राम पंचायत बरदर को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी सहायक राहुल की देखरेख में ग्राम पंचायत ने समय सीमा में कार्य को गुणवत्ता पूर्ण तरीके से पूरा किया। इस कार्य से एक हजार से ज्यादा मानव दिवस का रोजगार भी ग्रामीणों को प्राप्त हुआ। चेक डेम बन जाने के बाद यहां बड़ी मात्रा में जल संचय किया जा रहा है। चेकडेम से पीछे लगभग एक किलोमीटर तक बैकवाटर होने से आस पास का जल स्तर बेहतर हो रहा है। साथ ही किसानों को अपनी फसलों में सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल भी उपलब्ध हो पा रहा है। मोरघनिया नाले में बने चेक डेम से ग्राम पंचायत में रहने वाले किसान सत्यनारायण, फागुनाथ सिंह, राजकुमार, बलदेव, बाबूलाल, राजकिशुन, सुरेश और शिवप्रसाद जैसे कुल 20 किसानों के लगभग 17 एकड़ से अधिक भूमि में दो फसली सिंचाई सुविधा बढ़ गई है। इन किसानों ने बताया कि पहले सूख जाने वाले नाले में चेकडेम बन जाने से सिंचाई की दिक्कत समाप्त हो गई हैं अब हम अपनी मर्जी से फसलों की बुआई करके अच्छा लाभ कमा रहे हैं। वर्तमान में इस चेक डेम से लगी भूमि से लगभग दस एकड़ में उड़द और सब्जी की फसल लगी हुई है। इसके पहले किसानों ने धान और गेहूं की भरपूर फसल लेकर अच्छा मुनाफा कमाया है। कुल मिलाकर एक संसाधन से कई घरों में जीवन की शैली और स्तर में परिवर्तन साफ नजर आ रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी नरेगा के तहत बने एक पक्के चेक डेम ने उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में परिवर्तन लाना आरंभ किया है।

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