जब बात अपने ऊपर आई तो मंत्री जी को दिखा सड़क का गड्ढा!
दैनिक प्राईम संदेश
बलरामपुर कोरिया छत्तीसगढ़
स्टेट हेड अजीमुदिन अंसारी

सड़क की बदहाली से आम जनता लंबे समय से परेशान है, लेकिन जब इसी खस्ताहाल सड़क से होकर कृषि मंत्री रामविचार नेताम को गुजरना पड़ा, तो सड़क के गड्ढे अचानक सरकार की नजर में आ गए। रिपोर्ट के मुताबिक, जर्जर सड़क के कारण मंत्री कार्यक्रम में करीब दो घंटे देरी से पहुंचे और मौके से ही कलेक्टर को फोन कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंत्री की नाराजगी जायज है, अधिकारियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि जब यही गड्ढे आम जनता की राह में महीनों से पड़े हैं, तब उनकी सुध कौन लेगा?
बारिश के दौरान सड़क पर बने गहरे गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा तक नहीं होता। स्थानीय लोगों के लिए दिन में किसी तरह निकलना और रात में सफर करना जोखिम भरा बताया जा रहा है।
जनता पूछ रही है सवाल
क्या किसी मंत्री या अधिकारी के फंसने के बाद ही सड़क की हालत दिखाई देगी?
क्या आम जनता की परेशानी का कोई मूल्य नहीं?
सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च होने वाले सरकारी पैसों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अगर कुछ महीने पहले हुई मरम्मत के बाद सड़क फिर उखड़ गई, तो इसकी जांच और जवाबदेही कब तय होगी?
मंत्री जी ने अधिकारियों को फटकार लगाई है, अब जनता यह देखना चाहती है कि फटकार सिर्फ मौके तक सीमित रहती है या वास्तव में सड़क सुधरती है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ मंत्री की गाड़ी के फंसने का नहीं है…
सवाल उन हजारों आम लोगों का है, जो रोज इन्हीं गड्ढों के बीच सफर करने को मजबूर हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर चलने के बाद क्षेत्र के कितने गढे पाटे जाएंगे यह बहुत बड़ा सवाल है उदाहरण के लिए बैकुंठपुर क्षेत्र के जिले के अंदर और जिले की बहार कई गधे हैं जिसमें आए दिन रोज लोग गिर रहे हैं दुर्घटनाएं हो रही है खबर भी लगातार चल रही है कांग्रेस पार्टी भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी इज्जत बचाने के लिए बीच-बीच में धरना प्रदर्शन और और ज्ञापन देकर अपने साख बचाने को मजबूर है और भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्र के कर्मठ नेता छुट्टीलेकर चले गए हैं इसलिए उनकी जिम्मेदारी ही नहीं बनती है सिर्फ सत्ता में है यही उनकी जिम्मेदारी है सत्ता हासिल करना है उनकी जिम्मेदारी रह गई है ।