मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़! बैतूल में अनाधिकृत स्कूली वाहनों का खुलेआम संचालन,आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?
मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़! बैतूल में अनाधिकृत स्कूली वाहनों का खुलेआम संचालन,आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?
जिला परिवहन अधिकारी अनुराग शुक्ला की कार्यप्रणाली पर अजय सोनी ने उठाए गंभीर सवाल, निजी स्कूलों और वाहन संचालकों के गठजोड़ की निष्पक्ष जांच की मांग।
बैतूल। बैतूल जिले में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है। जिन नन्हे-मुन्ने बच्चों को उनके माता-पिता सुरक्षित भविष्य की उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं,उन्हीं बच्चों की जिंदगी कथित तौर पर अनाधिकृत एवं सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों के भरोसे छोड़ दी गई है। आखिर बच्चों की सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा ? क्या जिला परिवहन विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है ?

बैतूल जिले के विभिन्न निजी स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए उपयोग किए जा रहे वाहनों की वैधता, फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक के लाइसेंस एवं निर्धारित सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर जांच की आवश्यकता है। यदि बिना आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए वाहन बच्चों को ढो रहे हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है।
आम आदमी पार्टी जिला बैतूल के राष्ट्रीय परिषद सदस्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष,नर्मदापुरम जोन प्रभारी अजय सोनी ने जिला परिवहन अधिकारी अनुराग शुक्ला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर जिले में स्कूली बच्चों के परिवहन की व्यवस्था किसके भरोसे चल रही है?
अजय सोनी ने कहा कि जिला परिवहन अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में बैठकर कागजी कार्रवाई करना नहीं,बल्कि सड़कों पर संचालित वाहनों की वास्तविक स्थिति की निगरानी करना भी है। जब निजी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की वैधता और सुरक्षा की जांच होना आवश्यक है, तो फिर विभाग द्वारा नियमित और प्रभावी निरीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा है ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निजी स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों के बीच ऐसी कोई व्यवस्था या सांठगांठ है,जिसके चलते परिवहन नियमों की अनदेखी की जा रही है ? यदि ऐसा नहीं है, तो प्रशासन इसकी निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करे। आखिर बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर विभाग की चुप्पी के पीछे क्या कारण हैं ?
देश और प्रदेश में स्कूली वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं में बच्चों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करता,तो किसी भी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करने का प्रश्न भी खड़ा होगा।क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा,या उससे पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?
आम आदमी पार्टी की जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से निम्नलिखित मांगें की हैं—
जिले के सभी निजी स्कूलों में बच्चों के परिवहन में लगे वाहनों की तत्काल विशेष जांच कराई जाए।
बिना वैध परमिट,फिटनेस प्रमाण-पत्र,बीमा एवं आवश्यक दस्तावेजों के संचालित वाहनों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।स्कूली वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर रोक लगाई जाए।
प्रत्येक वाहन में निर्धारित सुरक्षा उपकरणों एवं सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
वाहन चालकों के वैध लाइसेंस,अनुभव एवं आवश्यक पुलिस सत्यापन की जांच की जाए।
निजी स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई की जाए।
निजी स्कूलों एवं वाहन संचालकों के बीच संभावित मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जिला परिवहन अधिकारी द्वारा अब तक किए गए स्कूली वाहनों के निरीक्षण एवं कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन एवं वाहन संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बच्चों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं !
अजय सोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों की जिंदगी किसी भी स्कूल प्रबंधन या वाहन संचालक के व्यावसायिक लाभ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रहना चाहते हैं, लेकिन यदि परिवहन व्यवस्था ही सवालों के घेरे में है,तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
आम आदमी पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग करती है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच अभियान चलाया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण न मिले और स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल सिर्फ परिवहन नियमों का नहीं,बल्कि बैतूल के हजारों मासूम बच्चों की जिंदगी और उनके सुरक्षित भविष्य का है। आखिर प्रशासन कब जागेगा ?