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जघन्य दोहरे हत्याकांड में सूरजपुर कोर्ट का सख्त फैसला

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*जघन्य दोहरे हत्याकांड में सूरजपुर कोर्ट का सख्त फैसला*

 

*3 आरोपियों को मृत्युदंड, चौथे को आजीवन कारावास*

 

*प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग पुत्री की हत्या मामले में वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध*होने पर

माननीय न्यायालय सूरजपुर में सुनाई सख्त सजा दैनिक प्राईम संदेश सूरजपुर छत्तीसगढ़ स्टेट हेड अजीमुदिन अंसारी

प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग पुत्री की जघन्य हत्या के मामले में सूरजपुर जिला एवं अपर सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को मृत्युदंड और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले में उपलब्ध वैज्ञानिक, परिस्थितिजन्य एवं अन्य ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया।

मामले में आरोपी कुलदीप साहू (25), फुल सिंह उर्फ रिंकू (28), आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा (20) और चन्द्रकांत चौधरी (28) के विरुद्ध थाना सूरजपुर में हत्या सहित गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया गया था। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक विमलेश दुबे के नेतृत्व में पुलिस ने विवेचना करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

 

*तीन को फांसी, एक को उम्रकैद*

 

प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग पुत्री की हत्या के मामले में कुलदीप साहू, फुल सिंह उर्फ रिंकू और चन्द्रकांत चौधरी को धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत मृत्युदंड तथा विभिन्न अन्य धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है। वहीं आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई है।

न्यायालय ने कुलदीप साहू को मृत्युदंड के साथ धारा 70(1) बीएनएस में मृत्यु पर्यन्त कारावास, धारा 331(8) एवं 61(2) बीएनएस में आजीवन कारावास तथा अन्य धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। फुल सिंह उर्फ रिंकू और चन्द्रकांत चौधरी को भी मृत्युदंड के साथ आजीवन कारावास एवं अन्य धाराओं में सजा सुनाई गई।

 

*वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष*

 

मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल के न्यायालय में हुई। विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार शर्मा ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। न्यायालय ने निर्णय दिनांक 8 अक्टूबर 2026 को मामले के समग्र तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध पाए।

 

सूरजपुर पुलिस की विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद आए इस फैसले को जघन्य दोहरे हत्याकांड में कड़ा न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

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