“लाल परी एंबुलेंस सेवा विवादों में, अस्पताल परिसर में नशे में चालक ने मारी टक्कर, गिरी बाउंड्री वॉल”
“मरीजों की जिंदगी की सवारी, या लापरवाही का सफर?”
किरंदुल: ग्रामीण अंचल के मरीजों के लिए जीवनरक्षक मानी जाने वाली एनएमडीसी किरंदुल परियोजना अस्पताल की निशुल्क एंबुलेंस सेवा में संचालित लाल परी ट्रांसपोर्ट एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। करीब 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले ग्रामीणों को अस्पताल तक पहुंचाने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई यह सेवा पिछले करीब एक वर्ष से शिकायतों और दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रही है। शुक्रवार की रात को लापरवाही की हद तब पार हो गई, जब अस्पताल परिसर में ही एक एंबुलेंस चालक ने वाहन से बाउंड्री वॉल को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दीवार का हिस्सा धराशायी हो गया। और नीचे बने घर की छत पर मलवा गिरा जिससे घर की छत टूट गई। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन घटना ने एंबुलेंस सेवा की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अगर वाहन में मरीज होता तो…?
इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हादसा अस्पताल परिसर में हुआ। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि यही वाहन मरीज को लेकर किसी ग्रामीण क्षेत्र की ओर जा रहा होता या गंभीर मरीज को अस्पताल ला रहा होता, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था। यदि यह बात जांच में सही पाई जाती है, तो मरीजों की जिंदगी से जुड़ी सेवा में यह बेहद गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार लाल परी कंपनी द्वारा संचालित इस एंबुलेंस सेवा के पिछले करीब एक वर्ष के दौरान कई बार वाहन दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। चालक की दक्षता, वाहन संचालन और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें उठती रही हैं। इसके बावजूद यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शिकायतों को गंभीरता से लिया गया?
अस्पताल प्रबंधन के सामने अब बड़ी चुनौती
एंबुलेंस सेवा सीधे ग्रामीण मरीजों की जिंदगी से जुड़ी है। ऐसे में चालक की योग्यता, ड्राइविंग कौशल, वाहन की फिटनेस और ड्यूटी के दौरान नशामुक्त होने जैसी व्यवस्थाओं की कड़ाई से निगरानी बेहद जरूरी है।
अब इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन के सामने है—क्या मामले की जांच कर जिम्मेदार चालक और संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई होगी? क्या एंबुलेंस चालकों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त व्यवस्था बनाई जाएगी?
क्योंकि एंबुलेंस महज एक वाहन नहीं, किसी मरीज के लिए जिंदगी और मौत के बीच की कड़ी होती है। इस कड़ी में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।