“लौह नगरी किरंदुल की मिट्टी से निकली, भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से सजी—देविका भादुड़ी की कलम से रक्षाबंधन पर विशेष”
“भाई-बहन का बचपन और बचपना”
ताकत की मिट्टी, भोलेपन का पानी,
उग्रता के गहने, जिम्मेदारियों और प्यार के कपड़े पहनाया,
शायद इसी तरह बनाने वाले ने
बहनों के लिए थोड़ा अड़ियल,
पर बहुत प्यारा भाई बनाया।
साथ-साथ हम बड़े हुए,
डांट पड़ने पर सुर-धरकर साथ में रोए,
गर्मियों की छुट्टियों में अनगिनत खेलों की पुकार,
और पहली बारिश में नहाना लाता था
सबको साथ में बुखार।
तो फिर भी हम कहाँ ही रुक जाते थे,
बीमारी में भी मनचाही चीज़ें माँगकर,
बुखार की होड़ में हम ऐश कर जाते थे।
छोटा-सा रूम, Mission और Treasure Hunt,
ख्याली पुलाव की दावत उड़ाया करते थे,
साथ पढ़ाई करने की बात कहकर
हम कितना ही पढ़ लिया करते थे।
बड़ी-बड़ी फेंक हम Kitchen का हुलिया बिगाड़ा करते थे,
काम का अकाम करके,एक-दूसरे का नाम फँसाया करते थे।
एक Topic, Useless Talks रात भर
हँसी-ठहाके लगाते है।
यूँ ही नहीं हम बड़ों की नज़र में
“Partners in Crime” कहलाते हैं।
Free Time में सुरों की गूँज
कानों में कुछ कह जाते है,
शायद उस बंद दरवाज़े के पीछे
हर रात Tansen और Arijit Singh
अपनी सभा लगाते है।
माँ-पापा के सामने नाम फँसाते,
फिर दयालू बनकर खुद ही बचाते हैं,
ये Actors आपस में भाई-बहन कहलाते हैं!
Maths में अंडा क्यों न आए,
सारा दिमाग बहन की गलती नापने में लगाते हैं,
यूँ ही नहीं मेरे Smart भाई
मम्मा-पापा से हर बार मार खाते हैं।
हम एक-दूसरे की
चलती-फिरती Secret Diary हैं,
सपनों में भी एक मुट्ठी की तरह
परिवार की ताकत बनने की
हमारी सदैव तैयारी है।
ये फ़र्ज़ी शहज़ादे
बहनों से Free में मज़दूरी कराते हैं,
Parents के Absence में
ये डरपोक, पापा की परियों को
गरीब-कमज़ोर बुलाते हैं।
सिर्फ यही नहीं,
हर जगह WWE Arena समझते हैं,
बहनों पर Fighting की बौछार कर
अपने आपको भीम समझते हैं।
पर कितनी भी रोक-टोक क्यों न करें,
पापा की तरह Care और प्यार जताते हैं।
यूँ ही नहीं हमारे Strong & Impulsive भाई
परिवार का चेहरा और
बहनों के Bodyguard कहलाते हैं।
बहनें भी कुछ कम नहीं,
भाइयों की सारी शिकायतें और गलतियाँ छुपाती हैं,
खुद कितना ही क्यों न लड़ें,
पर Parents और दुनिया के सामने
भाइयों को वकील बनकर उन्हें बचाती हैं।
शायद हम सब एक दिन
बड़े और कामयाब हो जाएँगे,
और शायद काबिल बनने की होड़ में
एक-दूसरे के लिए समय निकाल न पाएँगे।
पर फिर भी हम Understanding के पुतले समझे जायेंगे,
और लंबे अरसे के बाद भी,
पूरा बचपन एक पल में फिर से जी जाएँगे।
चाहे कोई आए, चाहे कोई जाए,
हम एक-दूसरे के Most Reliable, First & OnlyUnregrettable Partners कहलाएँगे।
फिर चाहे उन त्योहारों में
हम पहले की तरह मिल न पाएँ,
पहले जैसी मौज-मस्ती न कर पाएँ,
दिल में फिर भी वही बचपना रहेगा,
और रिश्ते में वही अपनापन रहेगा।
हर साल की राखी पर
अपने भाई-बहनों के साथ
उस बचपने और उल्लास से भरपूर
वही साथ बना पाऊँ—
I wish,
उस बीते बचपन को
उनके साथ फिर उसी तरह जी पाऊँ।
कब Career की Tension,
Time Utilization और Busy रहने की
हमारी उम्र आ गई,
कैसे इतनी जल्दी
मैं और मेरे बेवकूफ़ भाई-बहन
इतने बड़े हो गए!
शायद इसलिए राखी होती है
हर भाई-बहन के लिए
बचपन की Memories की Trip,
और एक ऐसी गाँठ—
जो सिर्फ कलाई पर नहीं,
दिलों में बँधती है।
And it’s not just a knot,
it’s a sealing the deal
of their forever partnership—
एक ऐसा रिश्ता,
जिसमें बचपन कभी खत्म नहीं होता,
बस उम्र बड़ी हो जाती है।
भाई-बहन का रिश्ता ऐसा ही होता है—
लड़ाई भी अपनी, प्यार भी अपना,
राज़ भी अपने,
और बचपना भी हमेशा अपना।
रक्षाबंधन पर भाई-बहन के अनोखे रिश्ते को समर्पित: देविका भादुड़ी