मझौली की जन सुनवाई बनी मजाक, नहीं पहुंच रहे मुख्य अधिकारी। आवेदन लिए इंतजार करते रहे दूर दराज से समस्या सुनाने आए फरियादी।
मझौली की जन सुनवाई बनी मजाक, नहीं पहुंच रहे मुख्य अधिकारी।
आवेदन लिए इंतजार करते रहे दूर दराज से समस्या सुनाने आए फरियादी।
सीधी/मझौली
शासन के निर्देशानुसार लोगों के समस्याओं को समाधान करने के लिए माह के प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 11 से 1 जिला पंचायत सहित ब्लॉक स्तर में जनसुनवाई आयोजित की जा रही है।भले ही चाहे समस्या का समाधान ना हो पा रहा हो पर जिले में प्रमुख अधिकारियों के उपस्थिति में सुनियोजित ढंग से जनसुनवाई संपन्न हो रही है। लेकिन मझौली उपखंड में आयोजित होने वाली जनसुनवाई विगत कुछ वर्षों से मजाक बन कर रह गई है।जो भी अधिकारी आते हैं। पूर्व के अधिकारी से एक कदम आगे निकल रहें हैं। सेवा निवृत्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मझौली आर पी त्रिपाठी अधिकारी भले ही चाहे लोगों की समस्या का समाधान ना कर पाते रहे हो।पर फरियादियों के सामने जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों को इतना फटकार लगा दिया करते थे कि फरियादी को 50 प्रतिशत तक की संतुष्टि तुरंत हो जाती थी। लेकिन उनके सेवानिवृत होते ही एक ऐसे अधिकारी जो यहां आने से पूर्व चर्चा का विषय बने हुए थे कि काफी तेज तर्राट पूर्व एसडीएम राजावत जैसे हैं। जिनके आगवन पर लोग काफी उत्साहित एवं ख़ुश थे ।लेकिन 1 महीने में ही पूर्व एसडीएम आरपी त्रिपाठी जो अधिकांश जनसुनवाईयों में उपस्थित रहकर लोगों की समस्या सुना करते थे जहां 50% तक विभागीय अधिकारी कर्मचारी भी उपस्थित रहा करते थे लेकिन उनके सेवानिवृत हो जाने के बाद आयोजित जनसुनवाई बद से बद्तर होती जा रही है। यहां तो अन्य विभागों के अधिकारियों -कर्मचारियों को छोड़िए प्रमुख अधिकारी ही जनसुनवाई से दूरी बनाए रहते हैं। आयोजित जनसुनवाई केवल पटवारी, आरआई, एवं तहसीलदार तक सिमिट कर रह जाती है। यह जनसुनवाई लोगों की समस्या समाधान के लिए नहीं बल्कि दो-तीन घंटे तक अधिकारियों- कर्मचारियों के गपशप के लिए माध्यम बनकर रह गई है। 40 -50 किलोमीटर की दूरी तय कर जनसुनवाई में पहुंच रहे लोगों को अधिकारियों से मुलाकात ना होने पर निराश होकर लौटना पड़ रहा है। बताया व देखा जा रहा है कि आफिस कार्यालयों की बात ही छोड़िए जनसुनवाई तक में भी समय से व नियमित रूप से प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अन्य विभागों के तो पूर्व की तरह निरंतर दूरी बनाए हुए हैं भले ही चाहे प्रतिबिंब रूप में दैनिक वेतन भोगी या गैर जिम्मेदार व्यक्ति को कभी-कभी भेज कोरम पूर्ण किया जाता हो लेकिन कई विभागों के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी जनसुनवाई में नहीं देखे जा रहे है। फिर भी इनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिससे जनसुनवाई प्रभारी के कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।