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बदहाल हुई मझौली की स्वास्थ्य व्यवस्था, फार्मासिस्ट लिख रहे मरीजों की दवा पर्ची, मारीज परेशान, जिम्मेदारों ने शादी चुप्पी!

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बदहाल हुई मझौली की स्वास्थ्य व्यवस्था, फार्मासिस्ट लिख रहे मरीजों की दवा पर्ची, मारीज परेशान, जिम्मेदारों ने शादी चुप्पी!

 

सीधी/ मझौली

 

जिले भर में लोगों की मूलभूत स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था दिनों दिन बदहाल होती जा रही है ।भले ही चाहे इस व्यवस्था के नाम से शासकीय खजाने की भारी भरकम राशि गलाई जा रही हो पर जिम्मेदारों की मनमानी,हठधर्मिता, कमीशन खोरी व भ्रष्टाचार के कारण दिनों दिन बदहाल होती जा रही है। चिंता जनक बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों के सामने जनसेवक भी फीके पड़ रहे हैं जो बदहाल स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था को नजर अंदाज कर चुप्पी साध रखे हैं।जिसका ताजा मामला इन दोनों मझौली उपखंड की स्वास्थ्य व व्यवस्था में देखने को मिल रहा है जहां लोगों को उपचार के लिए झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा ले जान गवानी पड़ रही है वहीं शिक्षा के लिए निजी स्कूल संचालकों के हाथों लूटने को मजबूर है।

बताते चलें कि उपखंड क्षेत्र अंतर्गत एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ लगभग आधा दर्जन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 30 से 40 उप स्वास्थ्य केंद्र है जहां लगभग दर्जन भर से अधिक डॉक्टरों का पद स्वीकृत है। लेकिन विगत कई वर्षों से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था दो- तीन डॉक्टर के हवाले छोडी गई है। जिससे लोगों को उपचार कराने झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। मकड़ी के जाल के समान फैले ए झोलाछाप बंगाली डॉक्टरों के नकली दवा का दंश भी झेलना पड़ रहा है यहां तक की अत्यधिक धन गमाने के बाद भी जान गवानी भी पढ़ रही है। जिस व्यवस्था को लेकर ना तो प्रशासनिक अमला गंभीर दिख रहा है ना ही जन सेवक।

 

*डॉक्टर तिवारी के जाने से बिगड़ी मझौली की व्यवस्था*

विगत एक दशकों से मझौली उपखंड में अपनी सेवाएं दे रहे सरल स्वभाव के डॉक्टर राकेश तिवारी जो कर्तव्य निष्ठा पूर्वक लग्नशीलता से लोगों की उपचार व्यवस्था संभाले हुए थे हाल ही में उनका स्थानांतरण पॉलिसी नीति के तहत जिला अस्पताल के लिए हो गया है जिनके चले जाने से एक ओर जहां लोगों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है वही पीएम के लिए भी घंटो घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। जिस कारण लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है इस आक्रोश का खामियांजा अस्पताल में तैनात प्रशिक्षुक इकलौते डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ को भुगतना पड़ रहा है। मझौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ऐसी हो गई है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ फार्मासिस्टों को मरीज देखना एवं दवा लिखना पढ़ रहा है।

 

*दूरी बना रखी है तैनात डॉक्टर*

 

दो डॉक्टर राकेश तिवारी एवं संदीप शुक्ला के स्थानांतरण के बाद बताया जा रहा है कि एक महिला डॉक्टर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में पदस्थ की गई है जिनके पास बीएमओ का प्रभार भी है लेकिन शायद ये भी मरीजों की संख्या एवं व्यवस्था से भयभीत होकर यहां से दूरी बना रखी हैं। अब देखना होगा जबकि दिनों दिन क्षेत्र की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होती जा रही है । इस व्यवस्था के जिम्मेदार व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कुछ कवायत करते हैं?

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