बैतूल: मुख्यमंत्री कन्या विवाह में अव्यवस्था का अंबार, जमीन पर बैठकर भोजन करने को मजबूर हुए ‘नवेले जोड़े’**
*बैतूल: मुख्यमंत्री कन्या विवाह में अव्यवस्था का अंबार, जमीन पर बैठकर भोजन करने को मजबूर हुए ‘नवेले जोड़े’**
**● भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में अव्यवस्था देख भड़के जयस नेता पप्पू ककोड़िया**
**● वीआईपी के लिए कुर्सियां और गरीबों के लिए जमीन? नारी सम्मान के दावों पर उठे सवाल**

**बैतूल।** एक ओर प्रदेश की भाजपा सरकार ‘नारी सम्मान’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले बैतूल में ही मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिला मुख्यालय पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम दिखा कि विवाह के पवित्र बंधन में बंधने आए वर-वधुओं को जमीन पर बैठकर भोजन करना पड़ा। प्रशासन की इस अनदेखी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था को लेकर अब क्षेत्रीय राजनीति गरमा गई है। **वीआईपी के लिए ‘खास’ और जनता के लिए ‘बदहाल’ व्यवस्था**
कार्यक्रम में मौजूद जयस प्रभारी और भीमपुर जनपद सदस्य **पप्पू ककोड़िया** ने सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के लिए वीआईपी टेंट और कुर्सियों की चकाचौंध वाली व्यवस्था की गई थी, वहीं जिन वर-वधुओं के सम्मान में यह आयोजन था, उन्हें दो वक्त की इज्जत की रोटी के लिए जमीन पर बैठना पड़ा। **”55 हजार की योजना, फिर भी बदहाली क्यों?”**
पप्पू ककोड़िया ने वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए घेरा कि> “योजना के तहत प्रति कन्या ₹55,000 का प्रावधान है। इसमें से ₹6,000 आयोजन (तंबू, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं) के लिए नगर निकाय या जनपद को दिए जाते हैं। सवाल यह है कि जब प्रति जोड़ा ₹6,000 खर्च करने का बजट है, तो फिर वर-वधुओं को बुनियादी सम्मान और बैठने की जगह क्यों नहीं मिली? क्या यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?”
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### **चुनावी जुमला बनकर रह गया नारी सम्मान?**
जयस नेता ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल चुनाव जीतने के लिए महिला आरक्षण और नारी सम्मान जैसे ढोंग करती है। उन्होंने कहा, “यह बेहद निंदनीय है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में गरीबों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है। अगर बैतूल के मुख्यालय का यह हाल है, तो प्रदेश के सुदूर ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।”
**ग्रामीणों में गहरा रोष**
कार्यक्रम में आए ग्रामीणों का कहना है कि सरकार सिर्फ वाहवाही लूटने में व्यस्त है। एक तरफ करोड़ों के विज्ञापन देकर आयोजन की पब्लिसिटी की जाती है, और दूसरी तरफ आयोजन स्थल पर गरीबों को अपमानित किया जाता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस अव्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भ्रष्टाचार की जांच हो।