News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी
भगवान श्रीराम के चरण पखारने के लिए केवट की अनूठी विनती का हुआ भावपूर्ण मंचन, गंगा पार कराने के प्रसंग ने दर्शकों को किया भावविभोर
भरवारी /कौशाम्बी: श्री रामलीला कमेटी पुरानी बाजार भरवारी की ओर से आयोजित ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव में सोमवार को भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। फतेहपुर से आए कलाकारों ने केवट संवाद, प्रयाग स्नान और चित्रकूट विश्राम की लीला प्रस्तुत कर दर्शकों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। विशेष रूप से भगवान श्रीराम और केवट के बीच हुए संवाद ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
केवट प्रसंग में दिखी भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल
रामलीला में दिखाया गया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ गंगा नदी के तट पर पहुंचते हैं। वहां उनकी मुलाकात केवट से होती है। भगवान श्रीराम जब केवट से नाव द्वारा गंगा पार कराने का आग्रह करते हैं तो केवट उनसे पहले चरण पखारने की अनुमति मांगता है। केवट की विनती सुनकर भगवान श्रीराम मुस्कुराते हैं और उसे अपने चरण धोने की अनुमति दे देते हैं।
इसके बाद केवट बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान श्रीराम के चरणों को पखारता है और चरणामृत को अपने परिवार सहित ग्रहण करता है। फिर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव में बैठाकर गंगा पार कराता है।

केवट ने भक्ति से जीत लिया भगवान का हृदय
केवट और भगवान श्रीराम का यह प्रसंग रामायण के सबसे भावपूर्ण प्रसंगों में से एक है। इसमें भक्ति, प्रेम, विश्वास और समर्पण का अद्भुत संदेश छिपा है। केवट जानता था कि भगवान श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि साक्षात परमात्मा हैं। लोकमान्यता के अनुसार, भगवान के चरणों की धूल से पत्थर तक नारी रूप में परिवर्तित हो गया था। ऐसे में केवट को आशंका थी कि कहीं उसकी नाव भी चरणों की धूल के स्पर्श से कुछ और न बन जाए। इसी भाव के साथ वह भगवान के चरण पखारने की जिद करता है।
इस प्रसंग का आध्यात्मिक संदेश यह है कि भगवान के दरबार में धन, पद और प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और निष्कपट प्रेम का महत्व होता है। केवट ने भगवान से उतराई के रूप में कुछ नहीं मांगा, बल्कि उनसे भवसागर पार कराने का आशीर्वाद मांगा। यही कारण है कि केवट संवाद आज भी रामभक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है।

इसके बाद कलाकारों ने प्रयाग में स्नान और चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम के विश्राम का प्रसंग प्रस्तुत किया। कलाकारों के सजीव अभिनय, भावपूर्ण संवाद और शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान रामलीला कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।