शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल- चार माह वीते विद्यालयों में पूर्ण नहीं हो सकी शिक्षकों की व्यवस्था।
नियमित शिक्षकों का स्थानांतरण एवं अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन नियुक्त प्रकिया व्यवस्था मे बनीं बांधा?
*अरविंद सिंह परिहार सीधी*
कक्षा 9,10 एवं 11वी-12वी की त्रैमासिक परीक्षा संपन्न हो चुकी है तथा अर्धवार्षिक परीक्षा की तिथि निर्धारित हो चुकी है। शिक्षा सत्र के चार माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक विद्यालयों में संपूर्ण विषय शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है।जो शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है? बच्चों के साथ अभिभावकों का आक्रोश उत्पन्न होता दिख रहा है।
व्यवस्था ना होने का कारण नियमित शिक्षकों का शैक्षणिक समय में

स्थानांतरण एवं अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन नियुक्त प्रकिया बताई जा रही है! यहां तक के नामी-गिरामी स्कूलो सांदीपनि व मांडल में भी अभी तक विषय शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिस से शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहा है।
बताते चलें कि नए सत्र 2026-27 की शुरुआत अप्रैल 2026 से की गई अप्रैल माह में शैक्षिक व्यवस्था हवा-हवाई रही जून ,जुलाई से जैसे ही शैक्षणिक कार्य की शुरुआत हुई शिक्षकों का स्थानांतरण एवं नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई। स्थानांतरित शिक्षकों के पोर्टल से न हटने एवं रिक्त स्थान न दिखने की वजह से अतिथि शिक्षक नियुक्ति में देरी होने का मामला सामने आ रहा है। वही अतिथि शिक्षकों आनलाइन नियुक्ति व्यवस्था भी कई विद्यालयों में प्रभाव डाल रखी है। आनलाइन जॉइनिंग प्रक्रिया में दूर- दराज के अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हो जाती है जो दूसरे व तीसरे राउण्ड में नजदीकी विद्यालय पाकर विद्यालय छोड़ चले जाते हैं ऐसे में प्रकिया पूर्ण करते-करते महीनो बीत जाते हैं। जिससे पठन -पाठन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। इस समस्या की जानकारी किसी और ने नहीं कैमरे से दूर हट शिक्षा विभाग व स्कूल प्रमुख के जिम्मेदारों द्वारा ही सामान्य रूप से दी जा रही है। यह समस्या किसी एक विद्यालय एवं ब्लॉक की नहीं पूरे जिले भर से सामने आ रही है।
*रिक्त स्थान के बाद भी नहीं बुलाये जा रहे शिक्षक*
कई विद्यालयों से ऐसी भी शिकायत सामने आ रही है कि रिक्त स्थान दिखने के बावजूद पैनल में शामिल अतिथि शिक्षकों आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। जबकि मिल रही जानकारी के अनुसार एक माह पूर्व ही ब्लॉक एवं जिले की पैनल सूची से स्कोर कार्ड में प्राप्त अंकों के आधार पर शिक्षकों को आमंत्रित कर शैक्षणिक कार्य संपादित कराये जाने का आदेश जारी किया गया है। यदि इस तरह का आदेश वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जारी किया गया है तो विद्यालय प्रमुखों के कार्य प्रणाली पर संदेश उत्पन्न होना वाजिब है।
*मॉडल एवं सांदीपनि जैसे विद्यालयों में योग्य शिक्षकों का अभाव*
सरकार द्वारा भले ही गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए जिले में कई मांडल एवं सांदीपनि विद्यालय खोली गई है लेकिन इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था योग्य शिक्षक एवं भवन के आभाव में दम तोड़ती दिख रही है। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शासकीय शिक्षकों की परीक्षा आयोजित की गई थी जिसकी व्यवस्था तो हो ही नहीं सकी जो भी योग्य अनुभवी शिक्षक थे या नई नियुक्ति पर पदस्थ किए गए थे स्वैक्षिक स्थानांतरण नीति व राजनीतिक ईर्षा के कारण मन चाही विद्यालय में चले जा रहे हैं। इन
नामी-गिरामी स्कूलो की शैक्षणिक व्यवस्था छटे -छुटे अतिथि शिक्षकों के हवाले चल रही है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। अभिभावकों एवं छात्र छात्राओ द्वारा समाचार पत्र के माध्यम से योग्य शिक्षक व समुचित शैक्षणिक व्यवस्था की मांग की गई है।