उज्जैन में किसके संरक्षण में पनप रहा कथित भू-माफिया का नेटवर्क?
भाजपा नेता और अफसर भी बालू खींची के आगे नतमस्तक?
उज्जैन में किसके संरक्षण में पनप रहा कथित भू-माफिया का नेटवर्क?
भाजपा नेता और अफसर भी बालू खींची के आगे नतमस्तक?
जमीनों पर कब्जे से लेकर कथित अवैध क्रेशर तक गंभीर आरोप, शिकायतें पहुंचीं भोपाल, EOW और लोकायुक्त की जांच की मांग
दैनिक प्राईम संदेश
तरुण दुबे
उज्जैन/भोपाल। उज्जैन जिले में जमीनों के कथित खेल को लेकर एक नाम इन दिनों लगातार चर्चा में है—बालू खींची। आरोप है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को भरोसे में लेकर उनकी जमीनों के दस्तावेज अपने नाम कराने से लेकर जमीनों पर कब्जे और कथित अवैध गिट्टी क्रेशर संचालन तक का नेटवर्क चलाया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही हैं तो आखिर बालू खींची को किस राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण का फायदा मिल रहा है? क्या स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली भाजपा नेताओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही?
जमीनों के नामांतरण को लेकर गंभीर सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित तौर पर भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भरोसे में लेकर उनकी जमीनों के दस्तावेज अपने नाम करवाए गए। अब सवाल यह है कि इन जमीनों के सौदों में दस्तावेजों की वैधता, लेन-देन और रजिस्ट्री प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जा रही?
कथित अवैध गिट्टी क्रेशर भी सवालों के घेरे में
बालू खींची से जुड़े बताए जा रहे कथित गिट्टी क्रेशर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्रेशर संचालन के लिए आवश्यक अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति, खनिज विभाग की अनुमति, जमीन का उपयोग और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच की मांग की जा रही है। सवाल सीधा है, क्या संबंधित विभागों ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की है?
ग्राम पंचायत में बनाया गया कथित अवैध स्वागत गेट
मामला केवल जमीन और क्रेशर तक सीमित नहीं बताया जा रहा। ग्राम पंचायत क्षेत्र में बनाए गए एक कथित अवैध स्वागत गेट को लेकर भी शिकायत सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इस गेट पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें तक लगाई गईं। शिकायत किए जाने के बावजूद यदि निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?
जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
पूरे मामले में उज्जैन जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई स्तरों पर शिकायतें करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।
शिकायत भोपाल तक पहुंची, अब EOW और लोकायुक्त पर नजर
मामले को लेकर शिकायत भोपाल में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। साथ ही लोकायुक्त में भी कार्रवाई की मांग किए जाने की चर्चा है। यदि जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संज्ञान लेती हैं तो जमीनों के दस्तावेज, रजिस्ट्री, नामांतरण, क्रेशर की अनुमति, खनिज संबंधी रिकॉर्ड और कथित राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बड़ा सवाल, संरक्षण किसका?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उज्जैन जिले में कथित भू-माफिया का यह नेटवर्क आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है?, क्या किसी भाजपा नेता या मंत्री का संरक्षण है? क्या स्थानीय अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव है? क्या शिकायतों को दबाने की कोशिश हुई? और यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित व्यक्ति सामने आकर दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करते? इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है, फिलहाल मामला शिकायतों और आरोपों के स्तर पर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।