बैतूल भूमि घोटाला : चरनोई की जमीन पर ‘खेल’! पंचायत का प्रस्ताव, NGO का निर्माण और प्रशासन के बयानों में विरोधाभास
एक ही जमीन का दो को प्रस्ताव , किसान की खड़ी फसल नष्ट
बैतूल भूमि घोटाला : चरनोई की जमीन पर ‘खेल’! पंचायत का प्रस्ताव, NGO का निर्माण और प्रशासन के बयानों में विरोधाभास
एक ही जमीन का दो को प्रस्ताव , किसान की खड़ी फसल नष्ट
रिकॉर्ड में आवंटन नहीं तो NGO को जमीन की अनुमति किसने दी? किसान की फसल पर JCB किसके आदेश पर चली
तरुण दुबे/दैनिक प्राईम संदेश
भोपाल/बैतूल । घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का नीमपानी गांव एक बार फिर बड़े भूमि घोटाले की वजह से सुर्खियों में है। ग्राम पंचायत पर एक ही सरकारी जमीन को दो अलग-अलग संस्थाओं, पढ़ार सहकारी समिति और प्लान इंटनेशनल NGO को आवंटित करने का गंभीर आरोप लगा है। यही नहीं, इसी जमीन पर 1982 से खेती कर रहे गरीब किसान संदीप नागवंशी को बिना कोई सूचना या नोटिस दिए, उनकी खड़ी फसल को जेसीबी मशीन से रौंदकर बेदखल कर दिया गया ।
पंचायत के पास नहीं है आवंटन का अधिकार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत के पास शासकीय भूमि आवंटित करने का कोई अधिकार नहीं है, तो उन्होंने ग्राम सभा में प्रस्ताव पास कर जमीन कैसे दे दी? इस मामले में शाहपुर एसडीएम ने स्पष्ट कहा कि “जमीन आवंटन सिर्फ बैतूल जिला कलेक्टर कर सकते हैं” । वहीं प्लान इंटनेशनल NGO का दावा है कि “बैतूल कलेक्टर ने जमीन के लिए परमिशन दी गई है,” जबकि घोड़ाडोंगरी तहसीलदार संध्या रावत का कहना है कि केवल “पढ़ार समिति को जमीन आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा” गया है ।
सभी पक्ष आपस में उलझे, एक-दूसरे पर मढ़ रहे जिम्मेदारी
· नीमपानी सरपंच का कहना है कि हमने ग्राम सभा में प्रस्ताव पास कर जमीन दे दी है।
· पढ़ार सहकारी समिति के प्रबंधक ने साफ किया कि उन्होंने सिर्फ आवेदन दिया है, जमीन उनके कब्जे में नहीं है और न ही उन्होंने किसी NGO को दी है।
· आवेदक संदीप नागवंशी ने आरोप लगाया कि “पंचायत ने पैसे लेकर NGO को जमीन दी है,” क्योंकि जबकि पढ़ार समिति को आवंटन होना था, दूसरे NGO ने कब्जा कर लिया ।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में नहीं बदलाव, फिर भी बन रही बिल्डिंग
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जब राजस्व पोर्टल पर नक्शे में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो “दिल्ली का NGO जमीन पर निर्माण कैसे कर सकता है?” यह प्रश्न पूरे मामले की गंभीर गड़बड़ी को उजागर करता है ।
किसान का दर्द: ‘बिना नोटिस जेसीबी चला दी’
संदीप नागवंशी, जो 1980 से इस शासकीय जमीन पर खेती कर रहे थे और समय-समय पर राजस्व विभाग को टैक्स और पेनल्टी चलान भरते थे, जिसको बिना किसी पूर्व सूचना के बेदखल कर दिया गया। उनकी खड़ी फसल को जेसीबी से नष्ट कर दिया गया, जिससे वे बेसहारा हो गए ।
अधिकारी आपस में टालमटोल में लगे
इस पूरे मामले में बैतूल जिला कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, सरपंच और NGO सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। जब इस विषय की गहराई से जांच की गई, तो पाया गया कि “सभी एक दूसरे के ऊपर ऊपर टाल रहे है मामला बड़ा है साठगांठ कर जमीन आवंटन हुआ है” ।