Breaking News in Primes

गुरुकुल स्कूल धामनोद में श्रद्धा एवं संस्कृति के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव*

0 0

लोकेशन धामनोद

संवाददाता मोनु पटेल

 

 

*गुरुकुल स्कूल धामनोद में श्रद्धा एवं संस्कृति के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव*

 

गुरुकुल स्कूल धामनोद के *आर.के. गैलेक्सी ऑडिटोरियम* में *सीसीए विभाग एवं छात्र परिषद* के संयुक्त तत्वावधान में *गुरु पूर्णिमा महोत्सव* श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

 

कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय प्रबंधन की *कोषाध्यक्ष श्रीमती सीमा भंडारी*, *डायरेक्टर श्री ध्वज भंडारी* एवं *प्राचार्या डॉ. शिल्पा शर्मा* द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजन के साथ हुआ।

 

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन *सांस्कृतिक सचिव लक्ष्य गुप्ता* ने चारों हाउस के सांस्कृतिक प्रीफेक्ट्स के सहयोग से किया। संगीत शिक्षिका *श्रीमती कृतिका दवे* के निर्देशन में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत *’गुरु सम्मान गीत’* ने समूचे वातावरण को श्रद्धामय बना दिया।

 

स्वागत उद्बोधन में *महेश्वरम हाउस के कप्तान वंश चौहान (कक्षा 11-ए)* ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही वह प्रकाश हैं जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। इस अवसर पर *छात्र परिषद* द्वारा अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

*कक्षा 12-सी की छात्रा वान्या अग्रवाल* ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की अमर कृति *रश्मिरथी’* के प्रभावशाली अंशों का ओजस्वी वाचन प्रस्तुत किया। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा, नैतिक मूल्यों तथा जीवन में गुरु के मार्गदर्शन की महत्ता को अत्यंत प्रभावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया।

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नृत्य एवं रंगमंच शिक्षक *श्री राजेश बडासे* के निर्देशन में प्रस्तुत *नृत्य-नाटिका* रही, जिसमें **महर्षि परशुराम और उनके शिष्य कर्ण* की कथा का सजीव मंचन किया गया। *कक्षा 11-ए के छात्र रणवीर केशान्या* ने *कर्ण* की भूमिका का अत्यंत प्रभावशाली एवं सशक्त अभिनय कर दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। उनके भावपूर्ण अभिनय, प्रभावी संवाद-अभिव्यक्ति तथा मंचीय उपस्थिति ने प्रस्तुति को जीवंत बना दिया। नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि *गुरु के समक्ष असत्य, छल या कपट का कोई स्थान नहीं है। असत्य के कारण कर्ण को गुरु परशुराम के शाप का सामना करना पड़ा, जो जीवन में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी एवं गुरु के प्रति पूर्ण निष्ठा का अमूल्य संदेश देता है।*

 

अपने संबोधन में *डायरेक्टर श्री ध्वज भंडारी* एवं *प्राचार्या डॉ. शिल्पा शर्मा* ने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति सम्मान, अनुशासन, सत्यनिष्ठा तथा भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा केवल ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों की आधारशिला है।

 

सम्पूर्ण कार्यक्रम श्रद्धा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान की भावना से ओत-प्रोत रहा। विद्यार्थियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया और गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व को स्मरणीय बना दिया।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!