*ब्यास कश्यप ने विधान सभा में उठाया जिला चिकित्सालय जांजगीर में भ्रष्टाचार का मुद्दा*
जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने विधान सभा मानसून सत्र के दूसरे दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए जिला चिकित्सालय जांजगीर में हुए 8 लाख 80 हजार रूपए राशि की अनियमितता का मामला उठाया। अपने ध्यानाकर्षण सूचना में उन्होंने लोक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का ध्यानाकर्षित करते हुए बताया कि जिला चिकित्सालय जांजगीर में मितानिनों, स्वीपरों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में गंभीर अनियमितता करते हुए उस राशि को चिकित्सालय में पदस्थ दो कर्मचारियों के खाते में अंतरित कर योजनाबद्ध तरीके से राशि का गबन किया गया है। ई-कोष आॅनलाईन के माध्यम से तैयार बिल में अस्पताल के सिविल सर्जन एवं अस्पताल प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। बिल के अनुसार उक्त राशि माह जनवरी 2023 से 2026 तक प्रेरक और स्वीपरों को भुगतान की जाने वाली राशि थी। इसी प्रकार उन्होंने विगत वर्ष जिला चिकित्सालय में जीवनदीप समिति मद की राशि में अनियमितता की जांच व कार्यवाही का मुद्दा भी उठाया। सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी और उस पर आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नही होने की बात भी उन्होंने रखी। विधायक ब्यास कश्यप ने आरोप लगाया कि जिला चिकित्सालय जांजगीर भ्रष्टाचार का गढ़ बना हुआ है। इससे स्थानीय लोगों में शासन एवं प्रशासन के प्रति गंभीर रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
ध्यानाकर्षण पर अपना वक्तव्य देते हुए मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि मार्च 2026 में आॅनलाईन एस.एन.ए. स्पर्श में वेण्डर वेलिडेशन में समस्या होने के कारण तथा उक्त राशि 28 मार्च 2026 में आहरण हेतु अंतिम तिथी थी जिसके कारण चिकित्सालय में कार्यरत 02 कर्मचारियों के खाते में राशि आहरित की गई। वर्तमान में उक्त राशि जिला चिकित्सालय जांजगीर के जीवनदीप समिति के खाते में जमा है। राशि वितरीत करने के लिए मितानिनों की
सूची तैयार की जा रही है
उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में हुई आगजनी पर सफाई देते हुए कहा कि इस आगजनी में कोई दस्तावेज नही जले हैं तथा चिकित्सालय को प्रत्यक्ष रूप से कोई हानि नही हुई है। उन्होंने जिला चिकित्सालय जांजगीर को भ्रष्टाचार का गढ़ कहे जाने को सिरे से खारिज कर दिया।
विधायक ब्यास कश्यप ने सदन में मंत्री से पूरक प्रश्न करते हुए पूछा कि राशि आहरण के लिए जब कोई तकनीकी समस्या थी तो उस राशि को व्यक्तिगत खाते में क्यों डाला गया? उसे सिविल सर्जन के विभागीय करंट खाते में क्यों नही डाला गया? उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए संलिप्त अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्यवाही की मांग की। जिस पर मंत्री की ओर से प्रदेश स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की 05 सदस्यीय जांच टीम के गठन की जानकारी दी गई तथा जांच उपरांत दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया? विधायक कश्यप द्वारा जांच कार्य होने तक संबंधित कर्मचारी को अन्य़त्र पदस्थ करने की मांग की गई ताकि जांच प्रभावित न हो। नेता प्रतिपक्ष डाॅ. चरणदास महंत ने भी जांजगीर-चांपा विधायक का साथ देते हुए दोषी कर्मचारी को जिला चिकित्सालय जांजगीर से हटाते हुए उन्हें बी.डी.एम. अस्पताल चांपा में पदस्थ करने की मांग की तथा उन्होंने भी दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की मांग की।