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बालू के ‘मौत के गड्ढे’ ने एक ही परिवार की खुशियां लील लीं; चंद मिनटों में बुझ गए दो इकलौते चिराग

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News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी

कौशांबी: सराय अकील थाना क्षेत्र के नेवादा चौराहे के पास गुरुवार की सुबह कुछ ही मिनटों में ऐसा दर्दनाक मंजर सामने आया, जिसने पूरे इलाके की आंखें नम कर दीं। बालू डंप में खनन के बाद बने गहरे पानी भरे गड्ढे ने एक ही परिवार के दो मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली। जिन आंगनों में कुछ देर पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब मातम और चीख-पुकार का सन्नाटा पसरा है।

हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य (8 वर्ष) और दिव्यांशु (6 वर्ष) सगे चचेरे भाई थे। आदित्य अपने पिता राकेश का इकलौता बेटा था, जबकि दिव्यांशु अपने पिता राजेश का इकलौता पुत्र। एक ही परिवार के दो इकलौते बच्चों की एक साथ मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों बच्चे खेलते-खेलते बालू डंप में बने गहरे पानी भरे गड्ढे के पास पहुंच गए। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में यह गड्ढा दोनों मासूमों के लिए मौत का कारण बन जाएगा। जब तक लोगों को जानकारी हुई और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

हादसे की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं। गांव की गलियां, जहां रोज बच्चों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां गुरुवार को सिर्फ मातम और सन्नाटा दिखाई दिया।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि खनन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू डंप में बने गहरे गड्ढों के चारों ओर न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड और न ही लोगों को दूर रखने की कोई व्यवस्था। यदि समय रहते सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए गए होते, तो संभव है कि यह हादसा टल सकता था।

अब पूरे इलाके की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे खतरनाक गड्ढों को सुरक्षित किए बिना छोड़ देना भविष्य में भी बड़े हादसों को न्योता दे सकता है। लोगों ने दोषियों की जिम्मेदारी तय करने और ऐसे स्थानों पर प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।

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