*विस्थापन की धीमी प्रक्रिया लोगों के लिए बन रही अभिशाप, गजाननो ने लेली दो और जान।*
*अरविंद सिंह परिहार सीधी*
धौहनी विधानसभा के आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्र कुसमी के तिनगी गांव में विगत रविवार के दरम्यानी रात गजाननों ने दो दंपतियों को अपना शिकार बना डाला।
घटना 31 मई 2026 दिन रविवार के दरमियानी रात लगभग 2 बजे की बताई जा रही है जहां हाथियों का झुंड गांव में पहुंच एक कच्चे मकान को अपना निशाना बनाते हुए सो रहे वृद्ध दंपत्ति को पैरों से कुचल मौत के घाट उतार दिए। मिली जानकारी के अनुसार भैयालाल पिता लालमन यादव उम्र लगभग 60 वर्ष तथा उसकी पत्नी घर के अंदर सो रहे थे तभी लगभग रात्रि 2 बजे के करीब हाथियों का झुंड उनके घर को निशाना बनाते हुए पति-पत्नी दोनों को पैरों से कुचल दिया जहां घटनास्थल पर दोनों ने दम तोड़ दिया। जिसकी खबर लगते ही क्षेत्र में मातम छा गया देखते ही देखते भारी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए और उनका आक्रोश फूट पड़ा ।लोगों का आरोप है कि विस्थापन की धीमी प्रक्रिया हम लोगों के जीवन के लिए अभिशाप बन गई है। एक ओर जहां जंगली जानवर लगातार फसलो को नुकसान पहुंचा रहे हैं वहीं मवेशियों तथा मानव की जान ले रहे हैं। लोगों का आरोप है कि फर्जी बड़े की चाय में विस्थापन अत्यंत मंदगति से चल रहा है? जो यहां के वास्तविक निवासी हैं उन्हें दरकिनार करते हुए फर्जी नाम वालों को मुआवजा वितरित किया जाता है। आरोप है कि विस्थापन में दलालों का बोल वाला है जो प्रशासनिक अधिकारियों से साट- गांठ कर कमीशन के आड़ में फर्जी नाम जुड़वा कर विस्थापन की राशि डकार रहे है। जो लोग मूल रूप से यहां निवास कर रहे हैं उन्हें शायद इसलिए रोक रखा गया है कि यदि गांव का विस्थापन पूर्ण हो गया तो फर्जी नाम जोड़कर की जा रही कमाई पर विराम लग जाएगा।
आरोप हैं कि विस्थापन प्रक्रिया में फर्जी बड़े का भारी बोल वाला है, फर्जीवाड़ा इतना है कि यहां अलग से गांव व मोहल्ले बनते जा रहे हैं। फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के जरिए भी विस्थापन की राशि कमीशन की आड़ में डकारी जा रही है!