आमला शहर बना जुआ घर, क्या पुलिस को नहीं है खबर ?
किसके संरक्षण में चल रहा आमला शहर में सट्टा पट्टी का खेल, सट्टा लिखते लिखते दो बने खबाड़
आमला शहर बना जुआ घर, क्या पुलिस को नहीं है खबर ?
किसके संरक्षण में चल रहा आमला शहर में सट्टा पट्टी का खेल, सट्टा लिखते लिखते दो बने खबाड़
आमला बना ‘जुआ-माफिया’ का अड्डा? 20 से अधिक ठिकानों पर खुलकर हो रहा सट्टा, पुलिस को क्यों नहीं है खबर ?
मनीष कुमार राठौर । 8109571743
बैतूल / आमला । आमला शहर में अवैध सट्टे का कारोबार खुलेआम पनप रहा है। ‘पुलिस वालों को क्या खबर’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए शहर के करीब 20 ठिकानों पर सट्टे की पर्चियां लिखी जा रही हैं। यह खेल सिर्फ सटोरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दो सिंडिकेट मास्टरमाइंड्स का हाथ बताया जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र में फैले नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे हैं। सवाल उठता है, क्या पुलिस इस बड़े खेल से अनजान है, या फिर कोई संरक्षण तंत्र काम कर रहा है? “आमला पुलिस थाने से महज कुछ दूर में सट्टे का यह खेल पुलिस की गश्त और कानून का मजाक उड़ा रहा है। अब देखना यह है कि यह प्राईम संदेश की खबर’ सुनने के बाद पुलिस विभाग में हलचल होती है या फिर ये ठिकाने अगले दिनों में और ‘खबाड़’ दिए जाने वाले सट्टे की आहुति बनते रहेंगे।”
कहाँ-कहाँ है सट्टे का बाजार?
हमारे सूत्रों के अनुसार, आमला शहर का कोई कोना बचा हुआ नहीं है जहाँ यह अवैध धंधा न पहुँचा हो। मुख्य स्थानों की सूची हैरान करने वाली है।
· ढकनी मोहल्ला
· गोस्वामी क्षेत्र
· लाइन पटरी के आसपास
· बस स्टैंड के पास
· स्टेशन रोड (रेलवे की दुकान समेत)
· रेलवे कालोनी
· साथ ही, शहर के अधिकांश पान की दुकानें, नाई की दुकानें और किराना स्टोर
दो मास्टरमाइंड, पूरे शहर का सिंडिकेट
सूत्र बता रहे हैं कि यह खेल रूक-रूक कर नहीं, बल्कि व्यवस्थित सिंडिकेट के तहत चल रहा है। दो नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं, जो न सिर्फ पर्ची लिखवा रहे हैं, बल्कि मोबाइल एप और कॉल के जरिए कमान संभाले हुए हैं। इनके संरक्षण और पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस प्रशासन: ‘जानकारी का अभाव’ या जानबूझकर अनदेखी?
जब अखबार के माध्यम से पुलिस को यह खबर दी जा रही है कि कहाँ-कहाँ पर खुलकर जुआ हो रहा है, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ जाती है। आमला एक छोटा शहर है, ऐसे में शहर के 20+ ठिकानों पर हो रहे अवैध कारोबार से पुलिस की आँखें चूर होना चौंकाने वाला है।
क्या कहना है ।
जब शहर में चल रहे हैं अवैध सट्टे के कारोबार पर पुलिस विभाग से वजन लेने के लिए कॉल किया गया तो कॉल नहीं उठाया गया टीआई के द्वारा ।
मुकेश ठाकुर आमला टीआई