विधायक के विकास प्रयासों पर ग्राम पंचायत चोपना का भ्रष्टाचार रवैया किसकी है मिली भगत ?
स्वीकृतियों के बाद भी ठप पड़ी विकास की लगाम, क्या है ग्राम पंचायत का मंसूबा?
विधायक के विकास प्रयासों पर ग्राम पंचायत चोपना का भ्रष्टाचार रवैया किसकी है मिली भगत ?
स्वीकृतियों के बाद भी ठप पड़ी विकास की लगाम, क्या है ग्राम पंचायत का मंसूबा?
संवाददाता विवेकानंद बैरागी

बैतूल / चोपना । सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को चरितार्थ करते हुए घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गंगा सज्जन सिंग उइके ने विधानसभा में सरकार के समक्ष जनता की माँगों को मुखरित कर अनेकों विकास कार्यों की सौगात दी । ग्राम पंचायत चोपना के सरपंच सचिव उसे अपने बाप की बख़ौती समझ डकारने में लग गए है वहीं क्षेत्रीय विधायक के प्रयास पर चोपना वासियों को मिली राशि सौगात सरपंच सचिव के लिए कमाई का जरिया बनता दिखाई दे रहा है ? क्योंकि राशि का बंदरबाट करना चोपना पंचायत की पुरानी आदत है ।

आपको बता दे कि मुख्यमंत्री विशेष निधि से चोपना क्षेत्र में चार प्रमुख कार्यों – टीन शेड निर्माण (चोपना-2, 24 लाख), टीन शेड निर्माण (पूंजी, 24 लाख), सामुदायिक भवन (हरी मंदिर चोपना, 24 लाख), एवं स्टॉप डैम निर्माण (24 लाख) – हेतु स्वीकृति एवं भूमिपूजन संपन्न हो चुका है।
प्रश्न उठता है कि क्या ग्राम पंचायत चोपना, जो कार्यान्वयन एजेंसी है, स्वयं को सक्षम समझती है, अथवा किन्हीं अदृश्य ‘आकाओं’ के इशारों पर चल रही है? सरकार ने धनराशि उपलब्ध कराकर अपना दायित्व निभा दिया, किंतु कार्यों में विलंब की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत पर आती है। यह विलंब जानबूझकर किया जा रहा है अथवा विधायक की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का षड्यंत्र? यह एक गंभीर प्रश्न है।

सवाल जिसका जवाब जनता जानना चाहती हैं ।
1. क्या ग्राम पंचायत चोपना जनता की है, या किसी आकाओं की कठपुतली?
2. क्या सरपंच मात्र एक कटपुतली मात्र है, जो इशारों पर नाचती है?
3. सचिव को किस अधिकार से जनता के करों की राशि को अपनी मनमानी एवं पक्षपातपूर्ण ढंग से बाँटने का अधिकार प्राप्त है?
*आगामी अंक में हम अनावरण करेंगे* कि कैसे बिना कार्य कराए ही सचिव ने किन-किन लोगों के खातों में अवैध राशियाँ अंतरित की ।
कैसे पंचायत में सरपंच सचिव ने मिलकर भ्रष्टाचार एवं घोटाले को अंजाम दिया है ?