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अब पूरे देश में इमरजेंसी के लिए सिर्फ 112 नंबर, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

तीन महीने में सभी राज्यों को हेल्पलाइन पूरी तरह लागू करने के निर्देश, ट्रॉमा केयर को बताया जीवन के अधिकार का हिस्सा

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अब पूरे देश में इमरजेंसी के लिए सिर्फ 112 नंबर, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

 

तीन महीने में सभी राज्यों को हेल्पलाइन पूरी तरह लागू करने के निर्देश, ट्रॉमा केयर को बताया जीवन के अधिकार का हिस्सा

 

नई दिल्ली। देशभर में आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने के भीतर आपात स्थिति के लिए एकीकृत हेल्पलाइन नंबर 112 को पूरी तरह संचालित करें। अदालत ने कहा कि दुर्घटना या संकट की स्थिति में तुरंत सहायता मिलना नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

 

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि ट्रॉमा (आघात) उपचार का अधिकार जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है और हर नागरिक को समय पर आपात चिकित्सा सहायता मिलना सुनिश्चित होना चाहिए।

आपात स्थिति में हर मिनट कीमती”, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तेजी ही जीवनरक्षक दवा

 

राहगीरों को मदद के लिए प्रेरित करने मजबूत ‘गुड समैरिटन’ व्यवस्था बनाने के निर्देश

 

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि सड़क दुर्घटना या किसी गंभीर आपात स्थिति में घायल व्यक्ति अक्सर सदमे और भ्रम की स्थिति में होता है तथा उसे तत्काल मदद की आवश्यकता होती है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि चिकित्सा सहायता मिलने में हुई देरी किसी व्यक्ति की जान पर भारी पड़ सकती है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा,ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सा हस्तक्षेप के बीतने वाला हर मिनट व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना को कम करता है। तेजी वास्तव में जीवनरक्षक दवा की तरह है।

 

अदालत ने राज्यों को निर्देश दिए कि वे एक प्रभावी ‘गुड समैरिटन’ शिकायत निवारण तंत्र भी विकसित करें, ताकि सड़क हादसों या आपात स्थितियों में मदद करने वाले लोगों को पुलिस कार्रवाई, पूछताछ या कानूनी परेशानियों का डर न रहे।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकारों को जमीनी स्तर पर सभी हितधारकों को जोड़ते हुए काम करना होगा, जिससे लोग बिना भय के जरूरतमंदों की मदद कर सकें।

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