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इंसान के साथ-साथ जानवर में भी प्रेम: श्रीमद् भागवत कलश यात्रा की धुन सुनकर भाव विभोर हुए*

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*इंसान के साथ-साथ जानवर में भी प्रेम: श्रीमद् भागवत कलश यात्रा की धुन सुनकर भाव विभोर हुए*

जांजगीर-चांपा – जांजगीर श्रीमद् भागवत कथा की दिव्य धुन और संगीतमय गायन में इतनी शक्ति है कि यह केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि मूक जानवरों को भी भाव विभोर कर देती है। यह कथा प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास करती है। भागवत कथा और जानवरों से जुड़े कुछ भावपूर्ण प्रसंग:

संगीतमय कथा का प्रभाव: जब पंडितों द्वारा संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जाती है, तो वहां मौजूद जानवर भी शांत होकर कथा सुनते हैं। कथा के भजनों की धुन उन्हें मंत्रमुग्ध कर देती है। गो-वंश की विशेष उपस्थिति: कई कथाओं में देखा जाता है कि पंडाल के आसपास गायें और अन्य पशु शांतिपूर्वक बैठे रहते हैं। यह माना जाता है कि कथा का दिव्य वातावरण उन्हें शांति प्रदान करता है।

भावविभोर करने वाली लीलाएं: जब कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं जैसे माखन चोरी, महारास या गोवर्धन धारण सुनाई जाती हैं, तो पंडाल में एक अलौकिक ऊर्जा भर जाती है, जिसे वहां मौजूद जानवर भी महसूस करते हैं। आध्यात्मिक महत्व: भागवत कथा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीव मात्र के कल्याण का मार्ग है। कथा का मुख्य उद्देश्य मन का शुद्धिकरण और भक्ति का उदय है, जो सभी जीवों के लिए फलदायी है। श्रीमद् भागवत कथा को सुनने के लिए कोई विशेष नियम नहीं हैं, यह प्रेम और विश्वास से कोई भी सुन सकता है। श्रीमद् भागवत महापुराण का पहला श्लोक: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ यह मंत्र आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सेतु है।

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