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*मोर गांव मोर पानी अभियान से जल संरक्षण की अनोखी पहल*

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*लोहारी पंचायत के तीन एकड़ बंजर पहाड़ पर बने 460 कंटूर ट्रेंच, वर्षा ऋतु में 20 लाख लीटर पानी होगा संरक्षित*

दैनिक

प्राईम संदेश एमसीबी छत्तीसगढ़

स्टेट हेड अजीमुद्दीन अंसारी

*एमसीबी, 13 मार्च 2026/* प्रदेश के मुख्यमंत्री श्विष्णुदेव साय द्वारा शुरू किए गए “मोर गांव मोर पानी” महाभियान के तहत जल संरक्षण को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री के आह्वान को गंभीरता से लेते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जलसंचयन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एमसीबी जिले की ग्राम पंचायत लोहारी में बंजर पहाड़ पर सैकड़ों कंटूर ट्रेंच बनाकर वर्षा जल संचयन की सराहनीय पहल की गई है।

ग्राम पंचायत लोहारी में पंचायत के किनारे स्थित लगभग तीन एकड़ बंजर पहाड़ी क्षेत्र में वर्षा जल को रोकने के उद्देश्य से सैकड़ों कंटूर ट्रेंच बनाए गए हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से आगामी वर्षा ऋतु में लगभग 20 लाख लीटर वर्षा जल को भूमिगत करने में मदद मिलेगी, जिससे भूजल स्तर बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

*कैसे हुई शुरुआत*

प्रदेश स्तर पर शुरू किए गए मोर गांव मोर पानी महाभियान में जनभागीदारी के आह्वान के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा योजना के अंतर्गत एमसीबी जिले के जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के ग्राम लोहारी में एक बड़े खाली पहाड़ी क्षेत्र का चयन किया गया। क्षेत्र की मिट्टी और ढलान का तकनीकी आंकलन करने के बाद यहां बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया। ग्रामसभा की अनुशंसा के आधार पर इस कार्य को 1 लाख 80 हजार रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई।

 

*ग्रामीणों का उत्साह*

ग्राम पंचायत लोहारी के सरपंच मोती सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के अभियान से प्रेरित होकर पंचायत में चर्चा के बाद इस कार्य का प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत कार्यालय भेजा गया। प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद ग्रामीण श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक कार्य में भाग लिया और तकनीकी सहायक मुकुल के मार्गदर्शन में लगभग सवा हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 460 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूरा किया गया।

 

*20 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन*

तकनीकी सहायक श्री मुकुल के अनुसार, इन कंटूर ट्रेंच के माध्यम से वर्षा ऋतु में लगभग 20 लाख लीटर वर्षा जल को भूमिगत करने में सफलता मिलेगी। क्षेत्र में औसतन प्रतिवर्ष लगभग 1000 मिलीमीटर वर्षा होती है, जिसके आधार पर पूरे निर्माण क्षेत्र में होने वाली वर्षा से प्राप्त जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 

*जल संरक्षण है मुख्य उद्देश्य*

जिला पंचायत एमसीबी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अंकिता सोम ने बताया कि कलेक्टर श्री डी. राहुल वेंकट के मार्गदर्शन में जिले में वर्षा जल संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में किसानों के खेतों में आजीविका डबरी बनाई जा रही हैं तथा बंजर भूमि पर हजारों की संख्या में कंटूर ट्रेंच सहित अन्य जल संरचनाएं स्वीकृत की गई हैं, ताकि बारिश की हर बूंद को संरक्षित किया जा सके और जल संकट से निपटा जा सके।

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