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संस्कृति केन्द्र प्रयागराज की मनमानी का हो रहा है विरोध।

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संस्कृति केन्द्र प्रयागराज की मनमानी का हो रहा है विरोध।

 

विंध्य के लोक कलाकारों को महोत्सव में नहीं किए शामिल

 

एक ही कलाकार का प्रति दिन दिलाई जा रही प्रस्तुति ।

 

*अरविंद सिंह परिहार सीधी*

 

शहर में चल रहे तीन दिवसीय लोकोत्सव में स्थानीय लोक कलाकारों की उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृत केंद्र प्रयागराज के द्वारा की जा रही उपेक्षा से स्थानीय एवं विंध्य के लोक कलाकार काफी आक्रोषित हैं। जिसके कारण उक्त लोकोत्सव महज खानापूर्ति तक सीमित होकर रह गया है। जिस उद्देश्य से भारत सरकार संस्कृत मंत्रालय के द्वारा स्थानीय लोक कलाकारों को प्रस्तुति देने का अवसर उपलब्ध कराता है और स्थानीय लोक कलाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करता है उसमें संस्कृत मंत्रालय के संस्कृत केंद्र प्रयागराज के अधिकारियों की मनमानी के कारण पानी फिरता नजर आ रहा है और उक्त आयोजन सिर्फ दिखावा व बजट खर्च करने तक सीमित हो गए हैं। जिले में हो रहे लोकोत्सव में स्थानीय कलाकारों को उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृत केंद्र प्रयागराज के कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा दरकिनार कर दिया गया है और स्थानीय कलाकारों के नाम पर खानापूर्ति करने के लिए कुछ ऐसे कलाकार जो अन्य विधा से संबंधित हैं उनकी प्रस्तुति कराकर खानापूर्ति की जा रही है। संस्कृत केंद्र प्रयागराज के द्वारा बाहर से बुलाए गए कलाकारों में से प्रत्येक कलाकारों की प्रतिदिन प्रस्तुति कराई जा रही है। बताया गया है कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकारों को महोत्सव में बुलाकर एक दूसरे प्रदेशों की लोक कला से अवगत कराया जाता है। किंतु यहां जिन लोक कलाकारों को बाहर से बुलाया गया है उनकी प्रतिदिन प्रस्तुति कराई जाती है। जबकि अलग-अलग दिन अलग-अलग कलाकारों की प्रस्तुति कराई जाती तो उसका बेहतर संदेश समाज में जाता। उक्त आयोजन का जिले में कोई प्रचार-प्रसार न किए जाने के कारण कार्यक्रम में आम जनता एवं स्थानीय कलाकारों की उपस्थिति नगन्य रहती है। संस्कृत केंद्र प्रयागराज के कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा जिले के सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े लोगों को न तो बुलाया गया और न ही उनसे संपर्क किया गया। मनमानी तरीके से आयोजन किया जा रहा है।

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*लोकगायक नारेन्द्र बहादुर की उपेक्षा उचित नहीं: सरस*

जिले के वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोककला के जनक डॉ. शिवशंकर शुक्ला सरस ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृत केंद्र प्रयागराज, संस्कृत मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा पूजा पार्क में आयोजित तीन दिवसीय लोकोत्सव में स्थानीय लोक गायकों और खासकर सीधी को लोक कला के क्षेत्र में पहचान दिलाने वाले ख्यातिप्राप्त लोकगायक नारेन्द्र बहादुर सिंह की उपेक्षा का मैं पुरजोर विरोध करता हूं। उक्त आयोजन में स्थानीय चर्चित व प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रस्तुति न कराकर संस्कृत केंद्र प्रयागराज ने जिले के सभी लोक कलाकारों एवं साहित्यकारों को अपमानित किए हैं। जिले की महिला लोक गायकों सत्या तिवारी, स्नेहलता द्विवेदी, अनुराधा द्विवेदी, शालिनी द्विवेदी को भी दरकिनार कर दिया गया है। यही नहीं जिले के लोक गायक अनूप तिवारी, अभिषेक तिवारी, प्रदीप शुक्ला, राम तिवारी जैसे लोक गायकों को भी आमंत्रित नहीं किया गया है। विंध्य में लोक कलाकार काफी संख्या में हैं जो अपनी लोक कला को आगे बढ़ाने में लगे हैं उनकी उपेक्षा समाज के लिए हितकारी नहीं है।

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*सांसद ने किया लोकोत्सव का शुभारंभ*

भारत सरकार संस्कृत मंत्रालय उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृत केंद्र प्रयागराज के द्वारा तीन दिवसीय लोकोत्सव का शुभारंभ सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि ऐसे आयोजनों से देश भर के लोक कलाकारों को देखने का अवसर मिलता है एवं स्थानीय कलाकारों को प्रदेश के बाहर से आए कलाकारों से सीखने का और समझने का अवसर मिलता है। महोत्सव के प्रथम दिन सुश्री सविता यादव छतरपुर के द्वारा बुंदेली गायन, मुरारीलाल तिवारी मथुरा के द्वारा मयूर एवं फूलों की होली सुश्री शर्मिला गदीली सिक्किम के द्वारा तमाग शैलो नृत्य, कैलाश ध्यानी उत्तराखंड के द्वारा गढ़वाल के लोकनृत्य, मूलचंद सागर के द्वारा राई नृत्य, रोशनी प्रसार मिश्रा सीधी के द्वारा कर्मा नृत्य, श्रृजन मिश्रा के द्वारा लोकगीत की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर अजीता द्विवेदी, पूजा कुशराम, पंकज पाण्डेय मंडल अध्यक्ष सीधी, विनीता मिश्रा, डॉ. मनोज सिंह, उपेन्द्र सिंह, कौशलेन्द्र सिंह, नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्रा, रजनीश जायसवाल, प्रजीत कुमार साकेत आदि उपस्थित रहे।

*इनका कहना है*

मैने जिला प्रशासन से स्थानीय कलाकारों का नाम मांगा था। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा मुझे नाम उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण हम लोगों ने अपने स्तर से स्थानीय लोक कलाकारों को प्रस्तुति के लिए अवसर दिया है। आगे इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि जिले के जो प्रतिष्ठित लोक कलाकार हैं उन्हें भी प्रस्तुति का अवसर प्रदान किया जाए।

*कृष्णमोहन द्विवेदी*

*कार्यक्रम अधिकारी लोकोत्सव सीधी*

उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृत केंद्र प्रयागराज द्वारा शहर में चल रहे तीन दिवसीय लोकोत्सव कार्यक्रम में स्थानीय चर्चित एवं प्रतिष्ठित कलाकारों को दरकिनार कर कार्यक्रम आयोजन के नाम पर जो फिजूलखर्ची की जा रही है उसकी मैं भारत सरकार सहित अन्य संबंधित विभागों में शिकायत करूंगा। यह सार्वजनिक कार्यक्रम है। किसी एक व्यक्ति एवं एक संस्था का कार्यक्रम नहीं है। ऐसे कार्यक्रमों में जन भगीदारी होनी चाहिए।

*उदयकमल मिश्रा समाजसेवी सीधी*

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