Breaking News in Primes

कृषि यंत्रों एवं प्रौद्योगिकी के विकास से कृषि में आया क्रांतिकारी परिवर्तन: मंत्री रामविचार नेताम

0 29

रायपुर,

कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि कुछ दशक पूर्व किसान खेती में परंपरागत कृषि उपकरणों का उपयोग करते थे। लेकिन प्रौद्योगिकी के विकास के कारण आज खेतों में ट्रैक्टर चलित कल्टिवेटर, रोटावेटर, कम्बाइन जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों एवं मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही अब कृषि में ड्रोन तथा ए.आई. तकनीक का उपयोग भी होने लगा है। कृषि मशीनरी के तकनीकी विकास के कारण कृषि के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है, इसके लिए देश के कृषि अभियंता तथा कृषि वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं।

 कृषि मंत्री श्री नेताम राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित कृषि अभियंताओं के दो दिवसीय 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजिनियर्स (इंडिया) छत्तीसगढ़ स्टेट सेन्टर, रायपुर एवं स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कृषि अभियांत्रिकी संकाय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से आए कृषि अभियंता शामिल हुए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि ‘‘सतत विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु कृषि अभियंताओं का योगदान’’ विषय पर आयोजित इस सगोष्ठी का विषय काफी ज्वलंत, प्रासंगिक एवं सारगर्भित है। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आज अनेकों चुनौतियां विद्यमान है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसान फसल उत्पादन संबंधी अनेक चुनौतियां से जूझ रहे हैं। ऐसे में कृषि अनुसंधान प्रौद्योगिकी विकास तथा कृषि यंत्रीकरण के द्वारा ही इस चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। श्री नेताम ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विभिन्न फसलों की 65 नई जलवायु लचीली फसल प्रजातियों का लोकार्पण किया है जो मौसम की प्रतिकूलताओं में भी अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कृषि अभियंताओं के इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे। श्री नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा किये गये नवीन अनुसंधानों एवं प्रौद्योगिकी विकास की सराहना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि भारत में कृषि के क्षेत्र में जो तीन मुख्य कमियां चिन्हित की गई हैं इनमें से कृषि के क्षेत्र में यंत्रों का उपयोग प्रमुख है। पिछले दशकों में कृषि मशीनरी के विकास तथा उपयोग को बढ़ावा मिलने के बावजूद आज भी हमारे देश में कृषि के क्षेत्र में मशीनरी का उपयोग अन्य विकसित देशों की अपेक्षा काफी कम है। उन्होंने कहा कि देश भर में कृषि मशीनरी के डिजाइन तथा तकनीक के विकास का कार्य किया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं और किसान अब कृषि यंत्रों का ज्यादा उपयोग करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा कृषि मशीनरी के प्रौद्योगिकी विकास की दिशा में काफी काम किया गया है और स्थानीय परिस्थितियों एवं किसानों की आवश्यकताओं को देखते हुए अनेक नवीन कृषि यंत्र विकसित किये गये हैं जिनका उपयोग छत्तीसगढ़ के किसान कर रहे हैं। समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय भू-जल बोर्ड, भारत सरकार के अध्यक्ष डॉ. सुनील के. अम्बस्ट ने कहा कि कृषि मशीनरी के विकास के साथ ही भू-जल संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में भी अधिक कार्य किये जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कृषि अभियंताओं के राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रकाशित पुस्तिका तथा 9 सितम्बर 2024 को आयोजित होने वाले बलराम जयंती समारोह के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कृषि अभियंताओं का सम्मान भी किया गया जिनमें डॉ. इन्द्रमणी मिश्रा, कुलपति वसंत राव नाईक, मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ परभणी, डॉ. टी.बी.एस. राजपूत, वरिष्ठ वैज्ञानिक, जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, डॉ. टी. विद्या लक्ष्मी, वरिष्ठ वैज्ञानिक केन्द्रीय पोस्ट हार्वेस्टिंग इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.सी.ए.आर. लुधियाना), डॉ. मधुरेश द्विवेदी सहायक प्राध्यापक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला तथा इं. राजकुमार श्रीवास संचालक शुभी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड रायपुर शामिल हैं। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विनय पाण्डेय को लाईफटाइम अचीवमेन्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक एवं अभियंता उपस्थित थे।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी में वर्तमान समय में कृषि के विकास हेतु बहु प्रासंगिक विषयों जैसे- इंजीनियरिंग इनपुट का संरक्षण और प्रबंधन, फार्म मशीनरी, कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत, मिट्टी और जल संरक्षण और प्रबंधन’’ आदि पर विस्तृत चर्चा होगी एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें मुख्यतः कृषि में जुताई-बुआई से लेकर कटाई-मड़ाई एवं प्रसंस्करण की क्रियाओं का मशीनीकरण, ड्रोन का उपयोग, रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग, कृषि बागवानी में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोटिक्स एवं आई.ओ.टी. का प्रयोग आदि विषयों पर सार्थक संवाद, प्रदर्शन, प्रस्तुतिकरण एवं विचारों का आदान-प्रदान होगा। जलवायु परिवर्तन एवं कृषि कार्यों के समय पर संपादन में कृषि श्रमिकों की घटती उपलब्धता के परिपेक्ष्य में कृषि अभियंताओं के बढ़ते महत्व एवं कस्टम हायरिंग जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता विकास की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा। इस कार्यक्रम में अभियंता, उद्यमी, वैज्ञानिक, उद्योगपति, शोधकर्ता, प्रगतिशील कृषक एवं देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्वत्तजन शामिल हुए जो किसानों की आय बढ़ाने के लिए यथोचित रणनीति को अंतिम रूप देंगे।

This error message is only visible to WordPress admins

Error 403: The request cannot be completed because you have exceeded your quota..

Domain code: youtube.quota
Reason code: quotaExceeded

Error: No videos found.

Make sure this is a valid channel ID and that the channel has videos available on youtube.com.

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!