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आत्मविश्वास और निर्णय लेने में दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई देती है

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लोकेशन गैरतगंज

संवाददाता गौरव व्यास

 

*आत्मविश्वास और निर्णय लेने में दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई देती है*

 

 

 

प्रदेश में जन सेवक शिवराज सिंह चौहान का अठारह वर्षों से जन-जन से आत्मीय संबंध अमिट है। यह संबंध भरोसे, विश्वास और मुफ्त का था। विदाई के समय लाड़ली बहनों के आंखों में आंसू से, शिव से लेकर जन-जन की आंखें नम हुई हैं।

 

ऋतु परिवर्तन, व्यवस्था परिवर्तन, युग परिवर्तन , दायित्व परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत सत्य है। प्रदेश में उदारता पूर्वक मिले दान उपरांत दायित्व परिवर्तन हुआ है, व्यवस्था परिवर्तन नहीं।

 

इतिहास साक्षी है, चाणक्य ने एक साधारण बालक को सड़क से उठाकर सम्राट बना दिया था। भारतीय राजनीति के अदम्य, साहसी चाणक्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी सड़क से उठाकर एक आम आदमी को सत्ता के सिंहासन पर बैठाकर, महाकाल की भस्म से राजतिलक किया है।

 

राजतिलक उपरांत 29 वें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। *प्रदेश को देखने में खूबसूरत मुख्यमंत्री मिला है, जिसकी छवि अभी निष्कलंक है, जिनकी भुजाओं में बल है, तलवार बाज़ी में निपुण हैं। उनकी आवाज में आत्मविश्वास और निर्णय लेने में दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई देती है।

 

प्रदेश में कई सरकारें आई और गईं ! कई मुख्यमंत्री आये और चले गए! लेकिन व्यवस्था परिवर्तन नहीं हुआ। जो यात्रा बंटाढार से शुरू हुई, मुफ्त खोरी तक जारी रही।

 

मोदी के मन की सरकार जनता का मन जीतेगी या नहीं, मुफ्त खोरी बंद करेगी या नहीं, नया इतिहास लिखेगी या नहीं भविष्य में शिलालेख पर लिखा जाएगा। लेकिन जन-जन को उम्मीद है , 2024 में अच्छे दिन आएंगे, प्रदेश का विकास होगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, किसानों के चेहरे पर खुशी आएगी, कर्मचारियों को पेंशन मिलेगी, दलित , शोषित, पीड़ित, वंचित शिक्षित होगा और मोहन के सुदामा के दिन भी बदलेंगे। सुशासन सशक्त होगा, प्रदेश भ्रष्टाचार से मुक्त होगा, अत्याचार नहीं होगा, अपराधियों में सरकार का डर होगा ।

 

सरकार को ऐसे भ्रष्ट लोगों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। जिन्होंने भूखे की रोटी, गरीब के तन ढकने के कपड़े और मजदूरों के निवाले छीने हैं। किसानों की आह निकल रही है और मजदूर पुकार रहे हैं। अब अन्याय बंद होना चाहिए।

 

निराश बहुत है किंतु जीने के लिए आशा छोड़ी नहीं जा सकती। पिछला पूरा साल शहरों के नाम बदलने, जिला और तहसील बनाने, भ्रष्टाचारियों को जमीन के अंदर दस फीट नीचे गाड़ने, पंचायत लगाने, बहनों को लखपति बनाने,मुफ्त बांटने और घोषणाओं में निकल गया।

 

बेशक शिवराज के राज में हमने तरक्की की है। लेकिन सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार का दिखावा एक गुप्त रोग बन गया है। जिसका उपचार जरूरी है। वर्ष 2023 में लाडली बहना योजना के प्रचार-प्रसार में 150 करोड़ और विज्ञापन पर 50 करोड़ खर्च करने का प्रावधान था । कर्ज पर कर्ज लेकर कंबल ओढ़ कर घी पीने की कला सरकार और जनता दोनों सीख गए । मुफ्त खोरी की योजनाओं के कारण पांव की सड़न ( अर्थ व्यवस्था) अभी दिखाई नहीं दे रही हैं। कड़वा सच यह है पांव से शुरू हुई सड़न चेहरे को कुरुप बना देगी। आडंबर और दिखावे के मुखौटे को उतारने का समय आ गया है।

 

श्रीमान! सरकार कैसे चल रही है, महत्वपूर्ण यह नहीं है! कौन चला रहा है, महत्वपूर्ण यह है ! महाविषधर कालिया नाग ने यमुना जी का जल विषैला कर दिया था ! तब सृष्टि की सरकार मुरली वाले, मोहन ने कालिया नाग का मर्दन करने के लिए लीला की थी ! वह भगवान हैं और आप सरकार! वह लोकस्वामी ! आप पांच साल के स्वामी! हम जानते हैं आप लीला नहीं कर सकते! कालिया नाग का मर्दन नहीं कर सकते! लेकिन भोपाल ताल में सत्ता के संरक्षण में खनन माफिया, भू माफिया, शिक्षा माफिया, चिकित्सा माफिया जलचर नागों का विषदंत और जहर तो निकाल ही सकते हैं !

 

 

प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ने से युवा निराश होकर आत्मघाती कदम उठाते हैं या मां बाप पर बोझ बन जाते है। प्रदेश में 30 लाख बेरोजगार हैं अर्थात 60 लाख हाथ काम को मोहताज हैं।

पौराणिक कथा अनुसार लड्डू गोपाल ने मुंह खोला, ब्रह्माण्ड दिखाई दिया। श्रीमान ! आप प्रदेश के बेरोजगारों का मुंह खुलवाकर देखिए ! जिसमें आपको राजश्री , कंगाल बाप और मां का कंकाल दिखाई देगा! इसलिए नशा मुक्ति दिवस, नशा मुक्ति अभियान की जरूरत नहीं है। नशे के उत्पादन बंद कीजिए। सरकारी कार्यालयों में लिफाफा नहीं मिला तो नॉट एप्रूव्ड , मिल गया तो एप्रूव्ड की व्यवस्था बंद करिए। चीते मत लाइए ! फीते मत काटिए ! बस औंचक निरीक्षण करिए ! व्यवस्था सुधर जाएगी ! भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा ! भूखी आवाम को आंकड़ों की बाजीगरी समझ नहीं आती! आंकड़ों की बात मत करिए ! भूख से उलझी हुई आंतें, कैसे सुलझें! ये बात कीजिए।

फ्री का लाड़-प्यार बंद कीजिए! काम करने वाले हाथों को काम दीजिए! नहीं तो लाड़ली बहनों को फ्री उपहार, प्रदेश का बंटाढार कर देगा ! भूखे को रोटी, तन ढंकने को कपड़ा और गरीब को मकान दीजिए! नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार कीजिए! निजी स्वतंत्रता का संरक्षण कीजिए! पर्यटन को बढ़ावा दीजिए! मनरेगा में मज़दूरों को काम दीजिए! बाल श्रमिक को बंधुआ मुक्त कीजिए!

 

यह मत समझिए कि लोकतंत्र में मिली जीत हमेशा बनी रह सकती है। मुफ्त खोरी की योजनाओं से मिली जीत कभी भी स्थाई नहीं होती। फटे हुए दूध को ढंककर उबालते रहने से यह दिलासा कब तक दिलाया जा सकता है कि बढ़िया खीर पक रही है ? घोषणा करना होगी कि प्रदेश किसी भी धर्म से ऊपर है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।

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