News By- हिमांशु उपाध्याय / नितिन केसरवानी
धनुष यज्ञ लीला में कलाकारों ने किया शानदार मंचन, भगवान श्रीराम के पराक्रम और मर्यादा का दिखा अद्भुत संगम
भरवारी/कौशांबी: श्री रामलीला कमेटी पुरानी बाजार भरवारी की ओर से हनुमत निकेतन प्रांगण में आयोजित रामलीला के चौथे दिन शनिवार को धनुष यज्ञ एवं परशुराम-लक्ष्मण संवाद लीला का भव्य मंचन किया गया। फतेहपुर से आए कलाकारों ने अपनी सजीव अभिनय कला से दर्शकों को त्रेतायुग की याद दिला दी। रामलीला के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
धनुष यज्ञ प्रसंग में राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार माता सीता के स्वयंवर में देश-विदेश के अनेक राजा-महाराजा भगवान शिव के विशाल पिनाक धनुष को उठाने और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं पाता। राजाओं की असफलता से राजा जनक निराश हो जाते हैं। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़ते हैं और सहज भाव से शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगते हैं। इसी दौरान धनुष भंग हो जाता है और उसकी गर्जना से पूरा परिसर गूंज उठता है। धनुष टूटते ही श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयघोष के साथ प्रभु का स्वागत किया।

इसके बाद भगवान परशुराम के क्रोधित होकर स्वयंवर सभा में पहुंचने का प्रसंग मंचित किया गया। टूटे हुए शिव धनुष को देखकर परशुराम का क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। इसी दौरान भगवान लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे, व्यंग्यपूर्ण और ओजस्वी संवाद होते हैं। लक्ष्मण के निर्भीक जवाब और परशुराम के क्रोधपूर्ण तेवरों ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। कलाकारों के शानदार अभिनय पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
धनुष यज्ञ की लीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के पराक्रम, विनम्रता, मर्यादा और धर्म की स्थापना का संदेश दिया गया। वहीं परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने वीरता, धैर्य और वाणी की ओजस्विता का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।