News By-नितिन केसरवानी
मनौरी विस्फोट में 11 मौतों के बाद पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन, आरोपी के पैर में लगी गोली; तमंचा-कारतूस बरामद, छह आरोपियों पर मुकदमा
कौशाम्बी: पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आधा दर्जन से अधिक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि करीब दर्जनभर मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मुख्य आरोपी नौसाद मुठभेड़ में गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, घटना के मुख्य आरोपियों में शामिल नौसाद अली को मंगलवार भोर करीब चार बजे चरवा थाना क्षेत्र के तेरामिल के पास एसओजी टीम ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस की कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। मुठभेड़ के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने उसके कब्जे से तमंचा और कारतूस बरामद किए हैं।
नौसाद अली को पटाखा फैक्ट्री से जुड़े आरोपी मोहम्मद आदिल का पिता बताया जा रहा है। इस मामले में नौसाद समेत कुल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार दबिश दे रही है।

पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई
विस्फोट के बाद पुलिस की भूमिका और स्थानीय स्तर पर निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में विभागीय कार्रवाई करते हुए पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह को लाइन हाजिर किया गया है। इसके अलावा चायल चौकी प्रभारी अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को भी लाइन हाजिर किया गया है। वहीं बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
प्रशासन की ओर से हादसे की जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई जारी है। अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर स्थानीय स्तर पर हुई कथित लापरवाही की भी जांच की जा रही है।

राजनीतिक कनेक्शन की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
इधर, इस पूरे मामले में फैक्ट्री संचालक आदिल के एक भाजपा नेता से कथित संपर्क को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। यदि जांच के दौरान किसी राजनीतिक व्यक्ति से संपर्क या संरक्षण से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो मामले की जांच का दायरा और बढ़ सकता है। प्रशासन द्वारा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) समेत अन्य तथ्यों की जांच किए जाने की चर्चा है। जब तक आधिकारिक जांच में पुष्टि न हो, इन कथित राजनीतिक संबंधों को आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


11 मौतों के बाद उठे गंभीर सवाल
मनौरी की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने अवैध विस्फोटक सामग्री के निर्माण और भंडारण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 11 लोगों की जान जाने और कई मकानों के तबाह होने के बाद अब पुलिस-प्रशासन के सामने न केवल आरोपियों को गिरफ्तार करने, बल्कि अवैध पटाखा कारोबार को संरक्षण देने या लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।
पुलिस की मुठभेड़ में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आगे बढ़ने पर कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।