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75 साल बाद भी सड़क का इंतजार: चारपाई पर ढोए जाते मरीज, पैदल विदा होती हैं दुल्हनें

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News By-नितिन केसरवानी

कौशाम्बी के अमरूपुर का डेरा गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी दूर, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

कौशाम्बी: डिजिटल इंडिया और हर गांव को सड़क से जोड़ने के सरकारी दावों के बीच कौशाम्बी जिले का अमरूपुर का डेरा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी करीब 150 की आबादी वाले इस गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है, जिससे ग्रामीणों का जीवन कठिनाइयों से घिरा हुआ है।

सड़क के अभाव में गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गांव में एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाने के कारण बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लादकर कई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। समय पर उपचार न मिलने से गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

गांव की यह बदहाली सामाजिक आयोजनों पर भी असर डाल रही है। शादी-विवाह के अवसरों पर बारात और वाहन गांव के भीतर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में दुल्हनों को आज भी कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल विदा होना पड़ता है, जो आधुनिक विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।

मानसून के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कीचड़ और जलभराव के कारण गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

वर्षों से उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द सड़क निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे चक्का जाम और व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

अमरूपुर का डेरा गांव की यह तस्वीर विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। चुनावी मंचों से किए जाने वाले विकास के वादे इस गांव की सीमा तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देते हैं। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।

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